भारतीय टीवी न्यूज के 5 दशकों का सफर: पूर्व प्रसार भारती अध्यक्ष ने लॉन्च की खास किताब

देश में टेलीविजन समाचारों का सफर कैसे शुरू हुआ और यह डिजिटल युग तक कैसे पहुंचा, इस पूरी यात्रा को अब एक किताब के जरिए समझा जा सकता है। नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में शनिवार को प्रसार भारती के पूर्व अध्यक्ष सूर्य प्रकाश ने अनुभवी प्रसारक और दूरदर्शन की पूर्व प्रोड्यूसर हरसरन बीर कौर पांडे की किताब 'The Evolution of TV News in India: From Doordarshan to Digital Disruption – An Insider's Account' का विमोचन किया।
ओम बुक्स इंटरनेशनल द्वारा प्रकाशित यह किताब भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता के करीब पांच दशकों के इतिहास को समेटे हुए है। इसमें बताया गया है कि कैसे दूरदर्शन के शुरुआती दिनों से शुरू होकर, सैटेलाइट टेलीविजन और फिर 24 घंटे चलने वाले न्यूज चैनलों और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म तक का बदलाव आया। इस मौके पर वन्यजीव फिल्म निर्माता माइक पांडे, दिग्गज न्यूज एंकर शमी नरंग, नीथी रविंद्रन और कोमल जी.बी. सिंह जैसी कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहीं।
सीमित संसाधनों से डिजिटल क्रांति तक की कहानी
किताब की लेखिका हरसरन बीर कौर पांडे ने 1970 के दशक की शुरुआत में दूरदर्शन के मंडी हाउस मुख्यालय से अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने उस दौर के अनुभवों को साझा किया है जब तकनीकी बुनियादी ढांचा बेहद सीमित था और रिपोर्टिंग फिल्म-आधारित होती थी। किताब में उन चुनौतीपूर्ण दिनों का जिक्र है जब संसाधनों की कमी के बावजूद बड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों को दुनिया तक पहुंचाया जाता था।
एक दिलचस्प किस्सा 1980 में जॉन लेनन की हत्या के समय का है, जब विजुअल सामग्री की कमी के कारण पांडे ने अपने निजी विनाइल रिकॉर्ड कवर का इस्तेमाल न्यूज बुलेटिन के लिए किया था। उन्होंने अपने 14 साल के दूरदर्शन करियर के दौरान 1975-77 के आपातकाल, जेपी आंदोलन, ऑपरेशन ब्लू स्टार, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या और उसके बाद हुए आम चुनावों जैसी ऐतिहासिक घटनाओं को कवर किया।
किताब में चुनाव प्रसारण के शुरुआती दिनों और प्रणय रॉय, अशोक लाहिड़ी व विनोद दुआ जैसे दिग्गजों के साथ काम करने के अनुभवों को भी संजोया गया है। इसके अलावा, लेखिका ने फिदेल कास्त्रो और यासेर अराफात जैसे अंतरराष्ट्रीय नेताओं की कवरेज और पूर्व प्रधानमंत्रियों की विदेश यात्राओं के दौरान की अपनी भूमिका का विवरण दिया है। प्रसारण के अलावा, उन्होंने यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) में अंतरराष्ट्रीय सिविल सर्वेंट के रूप में बिताए अपने 21 वर्षों के अनुभव को भी इस किताब में पिरोया है।