एसएस संधू को नोटिस पर ईआरओ का बड़ा खुलासा, नाम में विसंगति के कारण जारी हुआ था नोटिस

दिल्ली कैंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ) ने रविवार को स्पष्ट किया कि भारत के चुनाव आयुक्त एसएस संधू को जारी किया गया नोटिस एक प्रक्रियात्मक कदम था। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान यह नोटिस "नाम में विसंगति" श्रेणी के तहत दिया गया था। ईआरओ ने सोशल मीडिया पर आई खबरों के बाद एक प्रेस नोट जारी कर यह स्पष्टीकरण दिया। चुनाव आयोग के स्थापित नियमों के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम पिछली पुनरीक्षण सूची से सीधे नहीं जुड़ सके, उन्हें ऐसे नोटिस भेजे जा रहे हैं।
कार्यालय ने बताया कि एसएस संधू द्वारा दिए गए सभी दस्तावेज और तथ्य सत्यापित कर लिए गए हैं। उनका नाम वैध कर दिया गया है और 4 नवंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची के लिए सुरक्षित रख लिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया के संबंध में ANI ने मूल जानकारी साझा की है। आयोग के निर्देशों के अनुसार, न्यायपालिका, सार्वजनिक प्रतिनिधियों और अन्य विशिष्ट क्षेत्रों के लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल किए जाते हैं ताकि दावे और आपत्ति अवधि में दस्तावेज एकत्र हो सकें।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने रविवार को स्पष्ट किया कि SIR के दौरान नोटिस मिलने का यह कतई मतलब नहीं है कि किसी का नाम हटाया जाएगा। बिना सुनवाई का अवसर दिए किसी का नाम नहीं काटा जा सकता। नोटिस पाने वाले मतदाता अपने जवाब संबंधित ईआरओ या बीएलओ के पास जमा कर सकते हैं। नोटिस के निपटारे की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक पूरी की जानी है, जिसके बाद 4 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी।
दिल्ली सीईओ के दैनिक बुलेटिन के अनुसार, 31 अगस्त से 19 सितंबर के बीच कुल 84,263 फॉर्म-6 आवेदन मिले। नए आवेदकों के लिए फॉर्म-6 और पते के संशोधन के लिए फॉर्म-8 का उपयोग किया जा रहा है। 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नागरिक भी आवेदन कर सकते हैं। नागरिकों की सुविधा के लिए मतदान केंद्रों पर विशेष कैंप भी आयोजित किए जा रहे हैं ताकि सभी चुनावी सेवाओं का लाभ उठाया जा सके।