वोटर लिस्ट से मुस्लिम नामों की छंटनी? चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगे जवाब

देश में वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि दिल्ली और अन्य राज्यों में चुनाव आयोग (ECI) के सॉफ्टवेयर ने मुस्लिम मतदाताओं के नामों को disproportionately यानी असामान्य रूप से टारगेट किया है। इस पूरे मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करते हुए चुनाव आयोग से स्थिति रिपोर्ट मांगी है।
डेटा विश्लेषण से पता चला है कि दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी 13.6% है, लेकिन चुनाव आयोग के 'ERONET' सॉफ्टवेयर द्वारा 'लॉजिकल विसंगतियों' (logical discrepancies) के आधार पर फ्लैग किए गए लोगों में मुस्लिमों की संख्या 20.3% है। इसका मतलब है कि दिल्ली में गैर-मुस्लिमों की तुलना में मुस्लिम मतदाताओं के नाम फ्लैग होने की संभावना 60% ज्यादा रही। वहीं, परिवार के आकार से जुड़े पांच मानदंडों के तहत फ्लैग किए गए लोगों में 30% मुस्लिम पाए गए हैं।
बिहार और अन्य राज्यों का हाल
दिलचस्प बात यह है कि बिहार में, जहां इस तरह के 'लॉजिकल विसंगति' चेक लागू नहीं थे, वहां हटाए गए मतदाताओं में मुस्लिमों की हिस्सेदारी (18.4%) उनकी जनसंख्या (17.7%) के लगभग बराबर थी। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर तस्वीर चिंताजनक बताई जा रही है। साबर इंस्टीट्यूट के एक ऑडिट का दावा है कि विसंगतियों के नाम पर हटाए गए 27 लाख वोटरों में 70% से ज्यादा मुस्लिम थे। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में प्रभावित वोटरों में 34% और महाराष्ट्र की 38 महत्वपूर्ण सीटों पर करीब 30% मुस्लिम मतदाता थे।
इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग का कहना है कि उसकी प्रक्रिया कानूनी रूप से सही है और इसका मकसद केवल डुप्लिकेट या अपात्र वोटरों (मृत्यु या स्थान परिवर्तन के कारण) को हटाना है। वहीं, भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने स्पष्ट किया है कि हटाए गए नामों में कोई भी वैध मतदाता शामिल नहीं है।
दूसरी ओर, इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के तीन विशेष प्रतिवेदकों ने भारत सरकार से इस कथित गलत छंटनी पर स्पष्टीकरण मांगा है। राजनीतिक स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, 33 लाख फ्लैग की गई प्रविष्टियों में से लगभग 20 लाख का समाधान कर लिया गया है। दिल्ली में दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया 30 अक्टूबर 2026 तक चलेगी और अंतिम वोटर लिस्ट 4 दिसंबर 2026 को जारी होगी। प्रभावित लोगों की मदद के लिए 18 और 25 अक्टूबर को विशेष कैंप भी लगाए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि चुनाव आयोग नागरिकता पर अंतिम निर्णय नहीं ले सकता और वोटर लिस्ट की सटीकता बेहद जरूरी है।