NewsClick केस: दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ ED पहुंची सुप्रीम कोर्ट, FIR रद्द करने पर उठाए सवाल

NewsClick केस में FIR रद्द करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ ED ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

Kittu Kumari24 October 20263 min read0 viewsDelhi Local
NewsClick केस: दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ ED पहुंची सुप्रीम कोर्ट, FIR रद्द करने पर उठाए सवाल

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने न्यूज़क्लिक (NewsClick) मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की एफआईआर को रद्द कर दिया गया था। ईडी ने एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर हाई कोर्ट के आदेश को हटाने की मांग की है। एजेंसी का तर्क है कि हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण सबूतों को नजरअंदाज किया और रिट याचिका के स्तर पर ही एक तरह का 'मिनी-ट्रायल' कर दिया, जो कानूनी रूप से उचित नहीं था।

दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाते हुए कहा था कि इस मामले में धोखाधड़ी (धारा 420) और आपराधिक साजिश (धारा 120-बी) के आवश्यक तत्व मौजूद नहीं थे। हालांकि, ईडी का दावा है कि कोर्ट ने उन ईमेल और बयानों पर गौर नहीं किया, जो यह संकेत देते हैं कि फंडिंग की पूरी व्यवस्था पहले से तय थी। एजेंसी ने आरोप लगाया कि अदालत ने पीपीके न्यूज़क्लिक द्वारा पेश किए गए तथ्यों पर ज्यादा भरोसा किया और ईडी व पुलिस द्वारा दिए गए सबूतों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।

विदेशी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग का गंभीर आरोप

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ईडी के मुताबिक, पीपीके न्यूज़क्लिक ने 2018 में एक अमेरिकी कंपनी से 9.60 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त किया था। एजेंसी का आरोप है कि शेयर की कीमतें जानबूझकर बढ़ाकर 11,500 रुपये प्रति शेयर रखी गईं। ईडी ने इस फंडिंग को नेविल रॉय सिंघम से जोड़ा है, जिनके बारे में एजेंसी का दावा है कि उनके संबंध चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से हैं। आरोप है कि इस पैसे का इस्तेमाल गुप्त रूप से सूचना और दुष्प्रचार गतिविधियों के लिए किया जाना था।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब तक कई कानूनी कार्रवाइयां हो चुकी हैं:

  • दिल्ली पुलिस की EOW ने 2020 में धोखाधड़ी और साजिश के तहत FIR दर्ज की थी।
  • दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने UAPA के तहत और CBI ने FCRA के तहत अलग-अलग मामले दर्ज किए।
  • ईडी ने इन FIR के आधार पर दो अलग-अलग ECIR दर्ज कीं।

जांच एजेंसी का दावा है कि 9.60 करोड़ रुपये के अलावा, पीपीके ने सिंघम से जुड़ी कंपनियों से करीब 92 करोड़ रुपये और प्राप्त किए। यह पैसा कथित तौर पर 'सेवाओं के निर्यात' के नाम पर लिया गया था, जबकि ईडी का कहना है कि ऐसी कोई सेवाएं दी ही नहीं गई थीं। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि न्यूज़क्लिक के मालिक प्रबीर पुरकायस्थ ने इस पैसे का इस्तेमाल दिल्ली के साकेत इलाके में एक फ्लैट खरीदने के लिए किया। इस मामले में अब तक 4.93 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है।

ईडी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हाई कोर्ट द्वारा EOW की FIR रद्द किए जाने से मनी लॉन्ड्रिंग की जुड़ी अन्य कार्यवाहियों पर भी असर पड़ा है। एजेंसी का कहना है कि 2021 से कोर्ट के आदेशों के कारण वे जबरन कार्रवाई नहीं कर पाए थे, जिससे जांच प्रभावित हुई। इसके अलावा, ईडी ने इस बात पर भी चिंता जताई कि हाई कोर्ट ने सुनवाई खत्म होने के छह महीने बाद फैसला सुनाया और एजेंसी की महत्वपूर्ण दलीलों को रिकॉर्ड में नहीं लिया।

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