नेक्सा एवरग्रीन फ्रॉड केस में ED का बड़ा एक्शन, 34.91 करोड़ की संपत्ति जब्त

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ अपनी मुहिम तेज करते हुए नेक्सा एवरग्रीन धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने इस मामले में जांच के दौरान प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत करीब 34.91 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां कुर्क कर ली हैं। यह कार्रवाई कथित धोखाधड़ी और उससे जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों की जांच के हिस्से के रूप में की गई है।
पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड मामले में भी कड़ा प्रहार
सिर्फ नेक्सा एवरग्रीन ही नहीं, बल्कि ईडी ने एक अन्य बड़े मामले 'पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड' और अन्य से जुड़े आरोपियों पर भी शिकंजा कसा है। इस मामले में एजेंसी ने कुल 646.58 करोड़ रुपये की 211 अचल संपत्तियां जब्त की हैं। इन संपत्तियों में आलीशान होटल, कमर्शियल ऑफिस, रिसॉर्ट्स, कृषि भूमि और रिहायशी मकान शामिल हैं, जो महाराष्ट्र, केरल, उत्तराखंड, गोवा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और दादरा और नगर हवेली जैसे राज्यों में फैले हुए हैं।
जांच में खुलासा हुआ है कि पैनोरमिक ग्रुप ने 46 कॉर्पोरेट संस्थाओं का एक जाल बिछाया था। इन कंपनियों ने 'रूम नाइट्स की बिक्री' और टाइमशेयर हॉलिडे मेंबरशिप के नाम पर एक अवैध पोंजी स्कीम चलाई, जिसके जरिए देशभर के करीब 51 लाख मासूम निवेशकों को लुभाया गया और उन्हें अवास्तविक रिटर्न का वादा किया गया।
ईडी के मुताबिक, पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड ने 1997-98 से 2017-18 के बीच निवेशकों से कुल 9,577 करोड़ रुपये वसूले। इनमें से केवल 2,858 करोड़ रुपये ही वापस किए गए और 2,332 करोड़ रुपये एजेंट कमीशन के तौर पर बांटे गए। बाकी बचे 4,387 करोड़ रुपये अपराध की कमाई के रूप में आरोपियों द्वारा डाइवर्ट कर लिए गए।
एजेंसी ने पाया कि इस अवैध रकम को शगुन ट्रेडलिंक्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी शेल कंपनियों के जरिए घुमाया गया और फिर इसका इस्तेमाल ग्रुप कंपनियों, निदेशकों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर महंगी रियल एस्टेट संपत्तियां और रिसॉर्ट्स खरीदने के लिए किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने SEBI और MPID अधिकारियों द्वारा पहले से कुर्क की गई संपत्तियों को धोखाधड़ी से बेचकर कानूनी कार्रवाई को विफल करने की कोशिश की थी।