वोटर लिस्ट से कटा नाम? चुनाव आयोग ने बताया फिर से जुड़वाने का आसान तरीका

अगर स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की प्रक्रिया के दौरान गलती से आपका नाम वोटर लिस्ट से हट गया है, तो अब घबराने की जरूरत नहीं है। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने ऐसे नागरिकों के लिए वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाना आसान बना दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए 'फॉर्म 6' भरना होगा।
आमतौर पर फॉर्म 6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए किया जाता है, लेकिन इस बार आयोग ने इसे उन लोगों के लिए भी अनिवार्य कर दिया है जिनके नाम डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन अभियान के दौरान हटा दिए गए थे। यह अभियान मृत, डुप्लिकेट या अपात्र मतदाताओं को हटाने के लिए चलाया गया था, जिसमें कुछ वैध नाम भी गलती से कट गए।
अब नहीं देना होगा अतिरिक्त डिक्लेरेशन, डर खत्म
चुनाव आयोग ने मतदाताओं की सुविधा के लिए नियमों में ढील दी है। 30 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मौजूदगी में हुई एक समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया कि जिन राज्यों में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां फॉर्म 6 के साथ 'एनेक्सचर-डी' (अतिरिक्त घोषणा पत्र) देने की जरूरत नहीं होगी।
दरअसल, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के कारण कई वैध मतदाता कानूनी कार्रवाई के डर से आवेदन करने में हिचकिचा रहे थे। अब इस बदलाव से वह डर खत्म हो गया है। 7 अक्टूबर 2026 को आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को निर्देश दिया कि वे प्रभावित मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया को तेज करें। इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डोर-टू-डोर कलेक्शन दोनों का सहारा लिया जाएगा।
मतदाताओं की मदद के लिए बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे आवेदन प्रक्रिया को पूरा करने में नागरिकों की पूरी सहायता करें। वहीं, महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने फॉर्म 6 में कुछ संशोधनों का प्रस्ताव दिया है ताकि नागरिक बिना किसी कानूनी डर के अपना नाम फिर से दर्ज करा सकें।
ध्यान रहे कि फॉर्म 8 का उपयोग केवल प्रविष्टियों में सुधार, पते में बदलाव या ईपिक (EPIC) कार्ड बदलने के लिए किया जाता है। लेकिन अगर आपका नाम पूरी तरह से लिस्ट से गायब है, तो केवल फॉर्म 6 ही आपके काम आएगा।