Earth Infrastructure के 19 हजार खरीदारों की बढ़ी मुसीबत, ED ने जब्त की 352 करोड़ की संपत्ति
Earth Infrastructure के 19 हजार खरीदारों का इंतजार जारी, ED ने 352 करोड़ की संपत्ति अटैच की। जानें क्या है ताजा अपडेट।

अपना घर पाने का सपना देख रहे हजारों परिवारों के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। Earth Infrastructures Ltd (EIL) के करीब 19,000 होमबायर्स और निवेशक पिछले एक दशक से अपने जीवन की जमा पूंजी के फंसने के कारण मानसिक और आर्थिक तनाव से गुजर रहे हैं। कंपनी ने ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, लखनऊ और दिल्ली-NCR के नौ प्रोजेक्ट्स के नाम पर करीब 2,004 करोड़ रुपये वसूले थे, लेकिन अब तक यूनिट्स हैंडओवर नहीं की गईं।
इस पूरे मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। 22 अक्टूबर 2026 को ED ने EIL और उससे जुड़ी संस्थाओं की करीब 140 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को प्रोविजनली अटैच किया है। इससे पहले 12 अक्टूबर को भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी, जिससे अब तक जब्त की गई कुल संपत्तियों की कीमत लगभग 352 करोड़ रुपये पहुंच गई है।
प्रमोटरों पर कानूनी शिकंजा और कोर्ट की जंग
मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA, 2002) के तहत कंपनी के प्रमोटरों—अवधेश कुमार गोयल, रजनीश मित्तल, अतुल गुप्ता और विकास गुप्ता को 1 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल ED के स्टैंडिंग काउंसिल राहुल त्यागी दिल्ली हाई कोर्ट में अतुल गुप्ता को मिली जमानत को चुनौती दे रहे हैं, जिस पर अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में सुनवाई होनी है। इससे पहले SFIO ने भी कंपनी अधिनियम की धारा 447 के तहत जांच शुरू की थी।
राहत की एक किरण सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दिखी है। 5 मई 2026 को कोर्ट ने अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड और रोमा यूनिकॉन डिजाइनक्स कंसोर्टियम के रेजोल्यूशन प्लान को बहाल कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) की सुस्ती की कड़ी आलोचना की और कहा कि प्राधिकरण पेनल्टी ब्याज या एक्सटेंशन चार्ज का दावा नहीं कर सकता।
इस नए प्लान के तहत, अल्फा कॉर्प रुके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए लगभग 750 करोड़ रुपये निवेश करेगा। प्रोजेक्ट पूरा करने की समयसीमा 1 जून 2026 से शुरू हो चुकी है। वहीं, NCLAT ने 5 अक्टूबर 2026 को एक आदेश जारी कर Earth Towne Infrastructure Pvt Ltd (ETIPL) के खिलाफ अलग से चल रही दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) को रद्द कर दिया है, क्योंकि इसकी जमीन पहले ही EIL के मुख्य रेजोल्यूशन प्लान में शामिल की जा चुकी है।