दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनावों में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के खराब प्रदर्शन पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने गहरी नाराजगी जताई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस हार पर असंतोष व्यक्त किया है। एनएसयूआई चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई, जिसके बाद केंद्रीय नेतृत्व ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया है। सूत्रों के अनुसार, चुनाव प्रचार की रणनीति, उम्मीदवारों के चयन और प्रबंधन को लेकर पार्टी नाराज है।
आरएसएस के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने डूसू चुनावों में चार में से तीन केंद्रीय पैनल पदों पर जीत हासिल की।
20 राउंड की मतगणना के बाद अंतिम नतीजे घोषित किए गए, जिसमें अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के यश डबास ने एनएसयूआई के विजय मीना को हराया। उपाध्यक्ष पद पर शकीन ने जीत दर्ज की, जबकि सचिव पद पर रिया छावड़ी जीतीं। संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के लक्ष्य राज सिंह ने जीत हासिल की, जबकि एनएसयूआई एक भी खाता खोलने में असफल रही।
सूत्रों का कहना है कि संगठन के भीतर आपसी कलह और बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी ने एनएसयूआई की संभावनाओं को कमजोर किया।
कांग्रेस नेतृत्व इस मामले में जल्द ही प्रभारियों और नेताओं पर कार्रवाई कर सकता है। चुनाव प्रचार के दौरान सुरक्षा, आवास, परिसर के बुनियादी ढांचे और अकादमिक सुविधाओं जैसे मुख्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया था। इस चुनाव में एबीवीपी, एनएसयूआई और वामपंथी छात्र संगठनों सहित कुल 20 उम्मीदवार मैदान में थे।