दुर्गा शक्ति नागपाल से जुड़े अवमानना मामले में बड़ा मोड़, याचिकाकर्ता ने 30 साल पुराना केस वापस लिया

Kittu Kumari28 September 20262 min read3 viewsNational
दुर्गा शक्ति नागपाल से जुड़े अवमानना मामले में बड़ा मोड़, याचिकाकर्ता ने 30 साल पुराना केस वापस लिया

नयी दिल्ली, 28 सितंबर। 30 साल पुराने नजूल जमीन विवाद मामले में एक नया मोड़ आया है। इस मामले में कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल से जुड़ी अवमानना ​​कारروाई चल रही थी। याचिकाकर्ता दयानंद मिश्रा ने अदालत में हलफनामा दायर कर कहा है कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाएंगे और उन्होंने कार्यवाही बंद करने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही, मिश्रा ने सरकारी जमीन पर अपना 30 साल पुराना कब्जा भी स्वेच्छा से हटा लिया है।

यह मामला गोंडा में नजूल प्लॉट संख्या 514, 515, 524 और 525 से जुड़ा है, जो कमिश्नर कार्यालय और भवन के लिए आरक्षित हैं। यह मामला 1997 से अदालत में लंबित था। 2008 में स्थगन आदेश पारित होने के बाद भी सरकारी जमीन पर कानूनी कार्यवाही जारी रही। एक कथित फोन कॉल से जुड़े घटनाक्रम के बाद उच्च न्यायालय में अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू हुई, जिस पर अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।

सरकारी जमीन के इस पुराने मामले की जानकारी सामने आने के बाद, डिविजनल कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल ने मामले की नियमित समीक्षा की, रिकॉर्ड और मुकदमे की स्थिति की जांच कराई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सरकार का पक्ष मजबूती से रखने और राज्य के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कानूनी पैरवी करने का निर्देश दिया। जांच में यह रिपोर्ट भी सामने आई कि जमीन पर एक अनधिकृत स्कूल चल रहा था, हालांकि प्रशासन के निरीक्षण के दौरान वहां कोई छात्र या शिक्षक नहीं मिला था।

याचिकाकर्ता और कथित अतिक्रमणकारी एडवोकेट दयानंद मिश्रा, निवासी छावनी सरकार आनंदपुरी, सिविल लाइंस, गोंडा ने अब कार्यवाही बंद करने की मांग करते हुए हलफनामा प्रस्तुत कर दिया है और स्थल को भी खाली कर दिया है। याचिकाकर्ता के कानूनी लड़ाई से हटने और विवादित जमीन से कब्जा हटाने के बाद, अब प्रशासन भूखंडों को सुरक्षित करने और उनके निर्धारित सरकारी उद्देश्य के लिए उपयोग को सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।

दुर्गा शक्ति नागपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री की विजन के अनुरूप सरकारी जमीन की सुरक्षा और जनहित में उसका उपयोग हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। लगभग 30 वर्षों से लंबित इस मामले में अंततः सत्य की जीत हुई है और सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त करा लिया गया है। संबंधित पक्ष ने अदालत से आगे की कार्यवाही न करने का अनुरोध किया है और स्थल से कब्जा भी हटा लिया है। जमीन को अब सुरक्षित किया जाएगा और निर्धारित सरकारी उद्देश्य के लिए इसका उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

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