दिल्ली यूनिवर्सिटी में विभाजन के आर्थिक और जनसांख्यिकीय प्रभावों पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित

दिल्ली यूनिवर्सिटी में विभाजन के आर्थिक और जनसांख्यिकीय प्रभावों पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रवाद और इतिहास पर चर्चा हुई।

Kittu Kumari5 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली यूनिवर्सिटी में विभाजन के आर्थिक और जनसांख्यिकीय प्रभावों पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित

दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर इंडिपेंडेंस एंड पार्टीशन स्टडीज (CIPS) ने जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज (इवनिंग) के साथ मिलकर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया। 5 नवंबर को आयोजित इस कार्यक्रम का विषय "विभाजन ऑफ वेल्थ, डिस्प्लेसमेंट ऑफ वेलफेयर: लॉन्ग-टर्म इकोनॉमिक एंड डेमोग्राफिक पर्सपेक्टिव्स ऑफ पार्टीशन" था। इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य विभाजन के ऐतिहासिक, राजनीतिक और आर्थिक पहलुओं का विश्लेषण करना और युवा पीढ़ी को इतिहास के इन गहरे प्रभावों से अवगत कराना था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ऑल इंडिया एंटी-टेररिस्ट फ्रंट (AATF) के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा थे। उन्होंने अपने संबोधन में राष्ट्रवाद, देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की सर्वोच्चता पर जोर दिया। बिट्टा ने कहा कि हर नागरिक की पहली प्राथमिकता उसका देश होना चाहिए। उन्होंने अब्दुल हमीद और जसप्रीत सिंह अरोरा जैसे सैनिकों की वीरता को याद किया और छात्रों को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और कल्पना चावला जैसी शख्सियतों से प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने युवाओं से एक अखंड और धर्मनिरपेक्ष भारत की भावना को मजबूत करने की अपील की।

इतिहास की गलतियों से सीखने और भविष्य संवारने पर चर्चा

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सेमिनार में विशिष्ट अतिथि के रूप में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने हिस्सा लिया। उन्होंने विभाजन के भौगोलिक और ऐतिहासिक पहलुओं पर अपने विचार साझा करते हुए डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों का उल्लेख किया। प्रो. अग्निहोत्री ने तर्क दिया कि जब राष्ट्रीय सीमाएं प्राकृतिक भौगोलिक संरचनाओं के विपरीत मनमाने ढंग से तय की जाती हैं, तो वे भविष्य में संघर्ष की स्थिति पैदा करती हैं।

सीपीएस के अध्यक्ष प्रो. रवि प्रकाश टेकचंदानी ने सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी से सीखना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' केवल अतीत को याद करने के लिए नहीं है, बल्कि यह संकल्प लेने का दिन है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

कार्यक्रम की शुरुआत जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज (इवनिंग) की गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष प्रो. जे.पी. शर्मा के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद सीपीएस के निदेशक प्रो. रविंदर कुमार ने परिचयात्मक वक्तव्य दिया, जिसमें उन्होंने विभाजन को भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास की एक निर्णायक घटना बताते हुए इसके बहुआयामी अध्ययन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। इस सेमिनार में बड़ी संख्या में शिक्षाविदों, प्रोफेसरों और छात्रों ने हिस्सा लिया और गहन शैक्षणिक चर्चा की।

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