जर्मनी में गूंजी दिल्ली यूनिवर्सिटी की आवाज, प्रोफेसर कुमार आशुतोष ने यूनेस्को कॉन्फ्रेंस में किया भारत का प्रतिनिधित्व

दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के प्रोफेसर कुमार आशुतोष ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाया है। वह जर्मनी की टीयू डॉर्टमुंड यूनिवर्सिटी में आयोजित प्रतिष्ठित 'यूनेस्को चेयर कॉन्फ्रेंस 2026' में भारत के एकमात्र आमंत्रित वक्ता के रूप में शामिल हुए। इस वैश्विक मंच पर उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए।
कॉन्फ्रेंस का मुख्य केंद्र उच्च शिक्षा और तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (TVET) में अंतरराष्ट्रीय सहयोग था, ताकि सतत विकास लक्ष्यों के सिद्धांत और व्यवहार के बीच के अंतर को कम किया जा सके। इस आयोजन में दुनिया भर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं ने हिस्सा लिया।
डिजिटल स्किल्स और जर्मन एजुकेशन मॉडल पर जोर
प्रोफेसर कुमार आशुतोष ने इस सम्मेलन में अपना एक महत्वपूर्ण शोध पत्र प्रस्तुत किया, जिसका शीर्षक "पर्यटन क्षेत्र के कर्मचारियों के बीच डिजिटल कौशल अंतराल को संबोधित करना: यूरोपीय संघ और भारत के साक्ष्य" था। अपने इस तुलनात्मक अध्ययन के जरिए उन्होंने बताया कि तेजी से बदलते तकनीकी दौर में पर्यटन क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए डिजिटल दक्षता कितनी अनिवार्य है।
सिर्फ सेमिनार तक ही सीमित न रहते हुए, प्रोफेसर आशुतोष ने जर्मनी के एक व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान का औद्योगिक दौरा भी किया। वहां उन्होंने जर्मनी की मशहूर 'लर्निंग बाय डूइंग' (करके सीखना) पद्धति को करीब से देखा, जहां ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिकल सिस्टम जैसे क्षेत्रों में किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर दिया जाता है।
प्रोफेसर आशुतोष का मानना है कि जर्मनी का यह व्यावसायिक शिक्षा मॉडल भारत में अनुभव-आधारित और उद्योग-केंद्रित शिक्षा को बढ़ावा देने में बेहद मददगार साबित हो सकता है। इस दौरान उन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त शोध, शिक्षक-छात्र विनिमय कार्यक्रमों और शैक्षणिक साझेदारी की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के लाइफलोंग लर्निंग एंड एक्सटेंशन विभाग के छात्रों और स्टाफ ने इस उपलब्धि पर गर्व जताया है। विभाग के अनुसार, यह अंतरराष्ट्रीय भागीदारी वैश्विक शैक्षणिक सहयोग और सतत विकास के क्षेत्र में यूनिवर्सिटी की बढ़ती सक्रियता को दर्शाती है।