DU में प्रोफेसर अशोक प्रसाद मेमोरियल लेक्चर: जल संरक्षण और सस्टेनेबिलिटी पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

दिल्ली यूनिवर्सिटी के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट ने प्रोफेसर अशोक प्रसाद मेमोरियल एजुकेशनल ट्रस्ट (PAPMET) के साथ मिलकर तीसरा प्रोफेसर अशोक प्रसाद मेमोरियल लेक्चर आयोजित किया। सर शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल में हुए इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण, टिकाऊ विकास (सस्टेनेबिलिटी) और कचरे से संसाधन बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करना था। इस मौके पर यूनिवर्सिटी के करीब 400 छात्रों और 200 फैकल्टी मेंबर्स ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रोफेसर अशोक प्रसाद को श्रद्धांजलि देने और उनके जीवन पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री 'द जर्नी ऑफ प्रोफेसर अशोक प्रसाद' के प्रदर्शन से हुई।
'वेस्ट टू वेल्थ' और जल प्रबंधन पर जोर
इस खास आयोजन में 'वॉटरमैन ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर डॉ. राजेंद्र सिंह बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। वहीं, मुंबई इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी के पूर्व कुलपति पद्म प्रोफेसर गणपति डी. यादव ने 'वेस्ट टू वेल्थ' विषय पर अपना व्याख्यान दिया। प्रोफेसर यादव ने बताया कि कैसे कृषि अवशेष, प्लास्टिक और औद्योगिक कार्बन को केमिकल रिसाइक्लिंग और पायरोलिसिस जैसी तकनीकों के जरिए कीमती संसाधनों में बदला जा सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने कहा कि एक शिक्षक की असली विरासत उसके द्वारा प्रेरित किए गए छात्र होते हैं। उन्होंने 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कैंपस गतिविधियों और रिसर्च में सस्टेनेबिलिटी को जोड़ने की बात कही। उन्होंने छात्रों को पारंपरिक तरीकों से हटकर इनोवेशन और स्टार्टअप्स की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
मुख्य अतिथि डॉ. राजेंद्र सिंह ने भारत की नदियों और जल प्रणालियों को पुनर्जीवित करने की जरूरत पर जोर दिया। राजस्थान में अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान तभी सार्थक होता है जब समुदाय उसे अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए अपनाए। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में स्थानीय ज्ञान और जन-भागीदारी को सबसे अनिवार्य बताया।