DU में एक साल के मास्टर कोर्स में एडमिशन का संकट, 4,000 छात्रों का साल बर्बाद होने की कगार पर

दिल्ली यूनिवर्सिटी के 4,000 छात्र एक साल के मास्टर प्रोग्राम में सीट न मिलने से परेशान, मामला अब हाई कोर्ट पहुंचा।

Kittu Kumari26 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
DU में एक साल के मास्टर कोर्स में एडमिशन का संकट, 4,000 छात्रों का साल बर्बाद होने की कगार पर

दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत शुरू हुए फोर ईयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) के पहले बैच के छात्रों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। करीब 4,000 छात्र ऐसे हैं जो यूनिवर्सिटी के एक साल वाले मास्टर डिग्री प्रोग्राम में सीट पाने में नाकाम रहे हैं। इन छात्रों का आरोप है कि उन्हें चयन के लिए अपनाए गए प्राथमिकता-आधारित मानदंडों की सही जानकारी नहीं थी, जिसकी वजह से अब उनका पूरा शैक्षणिक वर्ष 2026-27 बर्बाद होने की कगार पर है।

मामला अब कानूनी मोड़ ले चुका है। अगस्त 2026 से अब तक लगभग 50 से 60 छात्रों ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। अदालत अब इस बात का समाधान ढूंढ रही है कि पहले से प्रवेश ले चुके छात्रों के हितों से समझौता किए बिना अन्य योग्य उम्मीदवारों को कैसे समायोजित किया जाए।

सीटों की कमी और प्रशासन की प्लानिंग पर सवाल

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यूनिवर्सिटी प्रशासन ने शुरुआत में एक साल के मास्टर प्रोग्राम के लिए केवल 1,100 सीटों की घोषणा की थी। हालांकि, छात्रों के भारी विरोध और अनुरोध के बाद रजिस्ट्रार विकास गुप्ता के अनुसार, इसे बढ़ाकर 46 प्रोग्रामों में कुल 5,857 सीटें किया गया। लेकिन यह संख्या उन 23,000 छात्रों के मुकाबले बेहद कम है, जिन्होंने 2025 में अपनी स्नातक की पढ़ाई का चौथा साल पूरा किया था।

यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों ने भी इस व्यवस्था की आलोचना की है। प्रोफेसर आभा देव हबीब का कहना है कि प्रशासन को सीटों की कुल संख्या पहले ही बता देनी चाहिए थी, ताकि छात्र अपनी डिग्री छोड़ने या आगे पढ़ने के बारे में सही फैसला ले सकें। वहीं, किरोरीमल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर रुद्राशीष चक्रवर्ती ने पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने 1 अक्टूबर 2026 को जारी उस नोटिफिकेशन का जिक्र किया, जिसमें क्रेडिट आवश्यकताओं में एक बार की छूट दी गई थी।

छात्रों का दर्द यह है कि जिस प्रोग्राम को पीएचडी या नेट (NET) की राह आसान करने के लिए बनाया गया था, वह अब उन्हें अदालतों के चक्कर लगाने पर मजबूर कर रहा है। याचिकाकर्ता गौरव शर्मा ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि वे अब एक अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।

बता दें कि NEP 2020 के तहत DU में कई एग्जिट विकल्प हैं: एक साल बाद सर्टिफिकेट, दो साल बाद डिप्लोमा, तीन साल बाद बैचलर डिग्री और चार साल बाद रिसर्च या ऑनर्स के साथ बैचलर डिग्री। एक विशेष प्रावधान के तहत, चौथे वर्ष को न्यूनतम 7.5 CGPA (SC/ST के लिए 7 CGPA) के साथ पूरा करने वाले छात्र सीधे पीएचडी प्रोग्राम के लिए आवेदन कर सकते हैं। एडमिशन डीन हनीत गांधी ने स्वीकार किया है कि आवेदकों की भारी संख्या के कारण चुनौतियां बढ़ गई हैं।

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