DU हिंदी विभाग में पीएचडी एडमिशन में धांधली का आरोप, ABVP के प्रदर्शन से इंटरव्यू स्थगित
दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में पीएचडी दाखिलों में धांधली का आरोप लगाकर ABVP और DUSU ने किया जोरदार प्रदर्शन।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में पीएचडी एडमिशन की प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में है। कथित अनियमितताओं के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) ने मोर्चा खोल दिया है। 28 अक्टूबर 2026 को इन संगठनों ने विभाग के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया, जिसकी तीव्रता इतनी अधिक थी कि उस दिन होने वाले इंटरव्यू आधिकारिक तौर पर स्थगित करने पड़े।
छात्र नेताओं का आरोप है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी है। ABVP के दिल्ली यूनिवर्सिटी सचिव अक्षय प्रताप सिंह और अन्य प्रतिनिधियों ने कहा कि विभाग में 150 से अधिक पीएचडी सीटें उपलब्ध होने के बावजूद, कई योग्य उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया। खास तौर पर उन छात्रों में नाराजगी है जिन्होंने नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (NET) और 'ओनली फॉर पीएचडी' कैटेगरी के जरिए क्वालीफाई किया था, लेकिन उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर रखा गया।
नोटिस की कमी और UGC नियमों का उल्लंघन
प्रदर्शनकारी छात्रों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि उम्मीदवारों को इंटरव्यू के समय की सूचना बेहद देरी से दी गई। कई छात्रों को तो इंटरव्यू के महज कुछ घंटे पहले ही जानकारी मिली, जिससे उनकी तैयारी और आने-जाने में भारी दिक्कत हुई।
यूनिवर्सिटी द्वारा 6 अक्टूबर 2026 को जारी सूचना के मुताबिक, आवेदन की अंतिम तिथि 18 अक्टूबर थी और इंटरव्यू 21 से 31 अक्टूबर के बीच होने थे। छात्रों का तर्क है कि वर्तमान एडमिशन प्रक्रिया यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग (UGC) के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन है।
छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक एक निष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं की जाती, उनका यह धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। इस पूरे मामले पर जब हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर सुधा यादव से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।