DU एडमिशन के लिए फर्जी PwD सर्टिफिकेट गिरोह का भंडाफोड़, 9 गिरफ्तार

दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन पाने के लिए फर्जीवाड़ा करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली पुलिस की नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ यूनिट ने इस बड़े घोटाले को पकड़ते हुए अब तक नौ संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। यह पूरा मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी फर्जी सर्टिफिकेट घोटाला से जुड़ा है, जहां छात्रों को विकलांगता श्रेणी (PwD) के तहत दाखिला दिलाने के लिए जाली दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे।
पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान कुल 27 फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र बरामद किए गए हैं। जांच में सामने आया कि यह गिरोह बहुत ही शातिर तरीके से काम कर रहा था और सरकारी अस्पतालों के नाम पर फर्जी सर्टिफिकेट तैयार कर छात्रों को उपलब्ध कराता था, ताकि उन्हें एडमिशन में आरक्षण का लाभ मिल सके।
नर्सरी एडमिशन में भी सामने आया था फर्जीवाड़ा
हैरानी की बात यह है कि इस तरह के फर्जीवाड़े की आहट पहले भी मिली थी। अक्टूबर की शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने एक और मामला दर्ज किया था, जिसमें 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए नर्सरी एडमिशन में 'विशेष आवश्यकता वाले बच्चों' (CWSN) की श्रेणी के तहत जाली सर्टिफिकेट जमा किए गए थे। 17 सितंबर को मिली एक शिकायत के बाद जब पुलिस ने इन दस्तावेजों की जांच की, तो पाया कि इनमें 41 प्रतिशत सुनने की अक्षमता (hearing impairment) दिखाई गई थी, जो पूरी तरह फर्जी थी।
इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं 318(2), 337, 340(2) और 61(2) के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और कितने छात्रों ने इन फर्जी दस्तावेजों के जरिए एडमिशन लिया है।
गौरतलब है कि दिव्यांगजनों के लिए सरकार ने 'यूनिक डिसेबिलिटी आईडी' (UDID) योजना लागू की है, ताकि एक नेशनल डेटाबेस तैयार किया जा सके और सरकारी लाभों के वितरण में पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन इस तरह के गिरोह इस व्यवस्था में सेंध लगाकर योग्य उम्मीदवारों के हक को मारने की कोशिश कर रहे थे।