DU Erasmus Program: विदेश जाकर पढ़ाई का मौका, लेकिन अटेंडेंस का रहेगा सख्त पहरा
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने इरास्मस प्रोग्राम के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं। आवेदन के लिए 66.67% अटेंडेंस अनिवार्य होगी।

अगर आप दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के छात्र, पीएचडी स्कॉलर या फैकल्टी मेंबर हैं और विदेश में पढ़ाई या रिसर्च करने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए बड़ी खबर है। दिल्ली यूनिवर्सिटी ने यूरोपीय संघ (EU) की मशहूर शिक्षा और प्रशिक्षण पहल 'इरास्मस+ प्रोग्राम' (Erasmus+ Programme) के लिए नए मोबिलिटी नियम जारी किए हैं। इन नियमों का मकसद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकादमिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है, लेकिन इसके लिए यूनिवर्सिटी ने पात्रता के कड़े मापदंड तय किए हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रोग्राम का लाभ उठाने के लिए छात्रों की अटेंडेंस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 66.67 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि जो छात्र इस सीमा को पूरा नहीं करेंगे, उन्हें परीक्षाओं से वंचित किया जा सकता है। वहीं, जिनकी अटेंडेंस 40 प्रतिशत से भी कम होगी, उन्हें अगले साल दोबारा एडमिशन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, चयन प्रक्रिया में अटेंडेंस रिकॉर्ड को 5 प्रतिशत का वेटेज भी दिया जाएगा, यानी आपकी क्लास में मौजूदगी ही आपके विदेश जाने का रास्ता आसान करेगी।
इन यूरोपीय यूनिवर्सिटीज के साथ जुड़ी है दिल्ली यूनिवर्सिटी
दिल्ली यूनिवर्सिटी दुनिया भर के शैक्षणिक संस्थानों के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रही है। वर्तमान में यूनिवर्सिटी ने यूरोप के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौते किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- जर्मनी का फ्री यूनिवर्सिटी बर्लिन (Freie Universität Berlin) और यूनिवर्सिटी ऑफ वुर्जबर्ग (University of Wuerzburg)
- पोलैंड की डब्ल्यूएसबी यूनिवर्सिटी (WSB University) और पेडागोगिकल यूनिवर्सिटी ऑफ क्राकोव
- स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ मलागा (University of Malaga)
- पुर्तगाल का इंस्टिट्यूटो पॉलिटेक्निको डी टोमार (Instituto Politecnico de Tomar)
इन समझौतों के जरिए यूनिवर्सिटी का लक्ष्य अपने स्कॉलर्स को ग्लोबल एक्सपोजर देना और अकादमिक माहौल को और बेहतर बनाना है। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी एक 'सेमेस्टर अवे प्रोग्राम' (Semester Away Programme) पर भी विचार कर रही है, जिससे अंडरग्रेजुएट छात्रों को विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई करने की लचीलापन और सुविधा मिल सकेगी।