दिल्ली में डीटीसी बस चालकों की हड़ताल छठे दिन भी जारी, ओखला डिपो पर 52 चालकों ने दिए इस्तीफे

Kittu Kumari20 September 20262 min read14 viewsDelhi Local
दिल्ली में डीटीसी बस चालकों की हड़ताल छठे दिन भी जारी, ओखला डिपो पर 52 चालकों ने दिए इस्तीफे

दिल्ली में डीटीसी बस चालकों की हड़ताल 20 सितंबर 2026 को छठे दिन में प्रवेश कर गई है, जिससे राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह हड़ताल 15 सितंबर 2026 से शुरू हुई थी। संविदा चालक अपनी दैनिक मजदूरी 862 रुपये से बढ़ाकर 1500 से 2000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। इस बीच ओखला (तांखड) डिपो पर स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 52 निजी बस चालकों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। संकट से निपटने के लिए कुछ स्थायी चालकों को बसें चलाने के लिए लगाया गया है, लेकिन चालकों की भारी कमी अब भी बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, डीटीसी को अपनी 6,631 बसों के बेड़े के लिए 16,577 चालकों की आवश्यकता है, जो प्रति बस 2.5 चालकों का अनुपात है। वर्तमान में डीटीसी के पास केवल 3,908 स्थायी और 4,314 संविदा चालक ही हैं, जो पूरी सेवा चलाने के लिए नाकाफी हैं।

वेतन विवाद और सरकार से बातचीत

वेतन और बेहतर कार्य स्थितियों को लेकर चल रहे इस विवाद के बीच परिवहन मंत्री पंकज सिंह डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं। सरकार ने चार महीने की छुट्टी, मेडिकल इंश्योरेंस और परिवार कवर जैसी अन्य मांगों को मान लिया है, लेकिन वेतन बढ़ाने की मुख्य मांग पर अभी भी पेच फंसा हुआ है। सरकार ने वेतन विवाद को आगे की समीक्षा के लिए श्रम विभाग को भेज दिया है। संविदा चालकों का कहना है कि स्थायी डीटीसी कर्मचारियों का वेतन 90,000 से 1,00,000 रुपये प्रति माह है, जबकि उनकी तुलना में उन्हें बहुत कम वेतन मिलता है। चालकों ने तब तक हड़ताल जारी रखने की कसम खाई है जब तक उनका वेतन नहीं बढ़ाया जाता। उनकी अन्य मांगों में ओवरटाइम वेतन, वार्षिक बोनस, सवैतनिक अवकाश, सार्वजनिक अवकाश पर काम करने का अतिरिक्त वेतन और बस में मामूली नुकसान के लिए वेतन कटौती बंद करना शामिल है।

यात्रियों की परेशानी और वैकल्पिक व्यवस्था

बस सेवाएं ठप होने के कारण आम यात्रियों को भारी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जो यात्रा आम तौर पर 20 रुपये में पूरी होती थी, उसके लिए अब लोगों को वैकल्पिक परिवहन साधनों पर 100 रुपये से अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं। यात्रियों की भीड़ को संभालने के लिए दिल्ली मेट्रो ने अपनी सेवाओं के फेरे बढ़ा दिए हैं। सेवा के इस अंतर को पाटने के लिए डीटीसी ने अस्थायी रूप से 2,693 स्थायी और संविदा चालकों को विभिन्न डिपो में तैनात किया है, लेकिन इसके बावजूद हड़ताल का असर शहर के कई टर्मिनलों पर साफ देखा जा सकता है।

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