हिमालयी पौधों के संरक्षण के लिए डॉ तारा देवी सेन को मिला संत ईश्वर सम्मान

हिमाचल प्रदेश की डॉ तारा देवी सेन ने अपनी मेहनत और समर्पण से देश का मान बढ़ाया है। हिमालयी पौधों के संरक्षण और एथ्नोबॉटनी (ethnobotany) के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित डॉ तारा देवी सेन सम्मान (संत ईश्वर सम्मान) से नवाजा गया है। मंडी की रहने वाली डॉ सेन ने औषधीय और जंगली खाद्य पौधों पर गहन शोध किया है, जिसमें उन्होंने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच एक सेतु का काम किया है। उनका यह प्रयास न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि सामुदायिक जागरूकता और स्थिरता को बढ़ावा देने में भी मददगार साबित हुआ है।
नई दिल्ली में आयोजित हुआ भव्य समारोह
यह सम्मान उन्हें 2 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के मावलंकर ऑडिटोरियम में आयोजित 11वें संत ईश्वर सम्मान-2026 समारोह के दौरान दिया गया। इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। संत ईश्वर फाउंडेशन और राष्ट्रीय सेवा भारती द्वारा आयोजित इस समारोह का उद्देश्य समाज, कला, साहित्य और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में निस्वार्थ सेवा करने वाले व्यक्तियों और संगठनों को सम्मानित करना था।
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने 'नर सेवा ही नारायण सेवा' के मूल मंत्र पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मानवता की सेवा करना ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। उन्होंने सरकारी योजनाओं को जन आंदोलन बनाने के लिए 'जन भागीदारी' के महत्व को रेखांकित किया और स्वच्छ भारत मिशन का उदाहरण दिया। साथ ही, उन्होंने युवाओं से करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी अपनाने की अपील की और एक विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए नशा मुक्त भारत के विजन को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।