डॉ नीरज धभाई ने लॉन्च की किताब, बताया भारतीय स्वास्थ्य सेवा में AI से कैसे बढ़ेगी पेशेंट सेफ्टी

दुनियाभर के आंकड़े बताते हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं के दौरान हर 10 में से एक मरीज को किसी न किसी तरह का नुकसान पहुंचता है, जिसमें से करीब आधे मामलों को रोका जा सकता था। इसी गंभीर समस्या के समाधान और तकनीक के सही इस्तेमाल पर जोर देते हुए हेल्थकेयर एक्सपर्ट डॉ नीरज कुमार धभाई ने अपनी नई किताब 'क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम्स: ट्रांसफॉर्मिंग पेशेंट सेफ्टी थ्रू एआई इन इंडियन हेल्थकेयर' लॉन्च की है। अध्यायन बुक्स द्वारा प्रकाशित यह किताब भारतीय मेडिकल इकोसिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (CDSS) के एकीकरण की बारीकियों को समझाती है।
क्या भारतीय अस्पताल इंटेलिजेंट सिस्टम के लिए तैयार हैं?
किताब के विमोचन के अवसर पर 'पेशेंट सेफ्टी इन द एज ऑफ एआई: आर इंडियन हॉस्पिटल्स रेडी फॉर इंटेलिजेंट क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट?' विषय पर एक पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि आज के दौर में एक औसत मरीज का सालाना करीब 80 MB इलेक्ट्रॉनिक डेटा जेनरेट होता है। इतनी बड़ी और बिखरी हुई जानकारी को सही क्लिनिकल संदर्भ में बदलने के लिए AI का होना बेहद जरूरी है।
मैक्स हेल्थकेयर के सीनियर डायरेक्टर और चीफ प्रोक्योरमेंट ऑफिसर डॉ एन वेंकटेशन ने स्पष्ट किया कि CDSS टूल्स का मकसद डॉक्टरों की जगह लेना नहीं, बल्कि उनके क्लिनिकल निर्णय लेने की क्षमता को और बेहतर बनाना है। वहीं, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से डिप्टी ड्रग्स कंट्रोलर (इंडिया) डॉ ए रामकिशन ने कहा कि सरकार एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जहां इनोवेशन और मरीज की सुरक्षा साथ-साथ चलें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि AI तकनीक साक्ष्य-आधारित, पारदर्शी और जिम्मेदारी से लागू होनी चाहिए।
डिजिटल हेल्थ की दिशा में भारत की प्रगति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश की ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा 6 अक्टूबर 2026 तक 50 करोड़ टेलीकंसल्टेशन का आंकड़ा पार कर चुकी है। अब इसमें रिमोट केयर वर्कफ्लो को बेहतर बनाने के लिए AI-पावर्ड CDSS को शामिल किया जा रहा है।
रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में सप्लाई चेन के वाइस प्रेसिडेंट डॉ नीरज धभाई ने कहा कि ये सिस्टम इसलिए महत्वपूर्ण हैं ताकि डॉक्टरों को सही समय पर वह जरूरी सुरक्षा जानकारी मिल सके, जो मरीज की जान बचाने में निर्णायक साबित हो। चर्चा के दौरान AI के विस्तार के साथ नैतिक दिशा-निर्देशों, डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार करने की आवश्यकता पर भी बात की गई।