दिव्यांगों के हक की आवाज बनीं डॉ कुसुम पथरिया, दिल्ली में मिला खास सम्मान
दिल्ली में डॉ कुसुम पथरिया को दिव्यांगों के उत्थान और अधिकारों के लिए 'अवार्ड ऑफ एप्रिसिएशन' से नवाजा गया।

नई दिल्ली में दिव्यांगजनों के अधिकारों और उनके सम्मान के लिए निरंतर संघर्ष करने वाली डॉ कुसुम पथरिया को एक प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है। सोशल जस्टिस एंड विमेन एम्पॉवरमेंट बोर्ड की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ कुसुम पथरिया को 'एसोसिएशन ऑफ रिहैबिलिटेशन प्रोफेशनल्स एंड पेरेंट्स' (ARPP) द्वारा 'अवार्ड ऑफ एप्रिसिएशन' प्रदान किया गया। यह सम्मान उन्हें दिव्यांग व्यक्तियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उनके मानवाधिकारों की वकालत करने के प्रयासों के लिए दिया गया है।
सहानुभूति नहीं, समान अवसर और सम्मान की जरूरत
सम्मान मिलने के बाद डॉ पथरिया ने बेहद भावुक और प्रेरणादायक विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि समाज सेवा के प्रति उनके समर्पण का प्रमाण है। उनके अनुसार, किसी भी इंसान के जीवन की सार्थकता इस बात से नहीं मापी जाती कि उसने क्या हासिल किया, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि उसने दूसरों के जीवन में कितनी उम्मीद और रोशनी बिखेरी है।
डॉ कुसुम पथरिया ने समाज की सोच पर प्रहार करते हुए स्पष्ट किया कि दिव्यांगजनों को सहानुभूति की नहीं, बल्कि समान अधिकारों और आत्म-सम्मान की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज का यह नैतिक दायित्व है कि वह उन्हें शिक्षा, सम्मान और बराबरी के अवसर प्रदान करे। उनके मुताबिक, जब तक समाज का आखिरी व्यक्ति समान अवसरों से वंचित है, तब तक उनका सामाजिक मिशन अधूरा है।
इस अवसर पर उन्होंने दिल्ली के ARPP के डॉ अमरकेश महेंद्रू और सभी सहयोगी संगठनों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें दिव्यांगों, महिलाओं और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए और अधिक संवेदनशीलता और ईमानदारी से काम करने की प्रेरणा देगा। डॉ पथरिया का मानना है कि सच्ची समाज सेवा वही है, जो जरूरतमंदों को गरिमा के साथ जीने का साहस दे सके।