दिल्ली मेट्रो ने टॉयलेट इस्तेमाल पर शुल्क को लेकर स्थिति की स्पष्ट

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन यानी डीएमआरसी ने मेट्रो स्टेशनों पर शौचालय के इस्तेमाल के लिए पांच रुपये शुल्क वसूलने की नीति पर स्थिति साफ कर दी है। डीएमआरसी का कहना है कि सार्वजनिक शौचालय सुविधाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए मामूली शुल्क लिया जाता है। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो लोग शुल्क देने में असमर्थ हैं, वे मुफ्त पहुंच के लिए स्टेशन के कर्मचारियों से संपर्क कर सकते हैं। सितंबर 2026 की रिपोर्टों में यात्रियों की चिंताओं के बाद इन शुल्कों को लेकर बहस चल रही है, क्योंकि यात्रियों का कहना है कि यात्रा टिकट खरीदने के बाद भी उन्हें सुविधाओं के लिए भुगतान करना पड़ रहा है।
जुलाई 2025 के एक आरटीआई जवाब के आधार पर अगस्त 2026 में दिल्ली उच्च न्यायालय के सामने जानकारी पेश की गई थी। इसके अनुसार डीएमआरसी ने पुष्टि की थी कि सभी स्टेशनों पर पुरुषों, महिलाओं, दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडरों के लिए शौचालय उपलब्ध हैं। अधिकांश शौचालयों के लिए मामूली शुल्क लिया जाता है, जबकि कुछ सुविधाएं मुफ्त भी हैं। कुछ शौचालय स्टेशनों के पेड एरिया यानी भुगतान वाले क्षेत्र के भीतर स्थित हैं, जबकि अन्य गैर-भुगतान वाले जोन में बाहर बने हुए हैं।
फरवरी 2023 में केंद्र सरकार ने राज्यसभा को सूचित किया था कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत डीएमआरसी मुफ्त पानी और शौचालय सुविधाएं प्रदान करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। सरकार ने यह भी नोट किया कि ऐसे परिचालन संबंधी निर्णय निगम के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसके अलावा 12 अगस्त 2026 को जारी एक आदेश में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने डीएमआरसी से शौचालयों की संख्या बढ़ाने और स्तनपान कक्ष यानी लैक्टेशन रूम शामिल करने का आग्रह किया था, क्योंकि याचिकाओं में भुगतान वाले स्टेशन क्षेत्रों के भीतर पहुंच की कमी का हवाला दिया गया था।