10 अक्टूबर के प्रदर्शनों के दौरान मेट्रो चालू थी, 32 लाख यात्री पहुंचे: DMRC

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर यह साफ किया है कि 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान मेट्रो नेटवर्क पूरी तरह से चालू था। DMRC ने अदालत को बताया कि संचालन या ट्रेनों के फेरों में कोई कटौती नहीं की गई थी, हालांकि उस दिन यात्रियों की संख्या में काफी कमी देखी गई।
आमतौर पर दूसरे शनिवार को मेट्रो में करीब 58 लाख यात्री सफर करते हैं, लेकिन प्रदर्शनों के कारण यह आंकड़ा गिरकर लगभग 32 लाख रह गया। DMRC का मानना है कि विरोध प्रदर्शनों के चलते आम जनता में यात्रा करने को लेकर हिचकिचाहट थी, जिस वजह से राइडरशिप में यह गिरावट आई।
45 स्टेशनों पर थी पाबंदी, DMRC ने मांगी माफी
अदालत को दिए गए जवाब में DMRC ने स्पष्ट किया कि कुल 303 स्टेशनों में से केवल 45 स्टेशनों (लगभग 15%) पर प्रवेश और निकास प्रतिबंधित किया गया था, जबकि बाकी 258 स्टेशन पूरी तरह चालू थे। DMRC की चेयरपर्सन डी. थारा ने अदालत से बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि संगठन केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के निर्देशों का पालन करता है।
DMRC ने यह भी तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं ने सेवाओं के पूरी तरह बंद होने का गलत दावा किया है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पुष्टि की कि 45 स्टेशनों पर प्रतिबंध था और दोपहर 2 बजे हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को शाम 6 बजे तक रिहा कर दिया गया था।
यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष बेंच (जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना) के सामने है, जो 10 अक्टूबर को लगाए गए प्रतिबंधों और कथित अवैध हिरासत से जुड़ी अवमानना याचिकाओं की सुनवाई कर रही है। अदालत ने सभी संबंधित याचिकाओं पर अगली सुनवाई 15 अक्टूबर, 2026 के लिए तय की है।