10 अक्टूबर के प्रदर्शन: DMRC ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, कोई मेट्रो ट्रेन नहीं हुई रद्द

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सुप्रीम कोर्ट को एक हलफनामा सौंपकर यह साफ किया है कि 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान मेट्रो ट्रेनों की सेवाओं में कोई कटौती नहीं की गई और न ही किसी ट्रेन को रद्द किया गया। DMRC ने कोर्ट को बताया कि उस दिन शनिवार का सामान्य शेड्यूल लागू था, जिसके तहत कुल 271 ट्रेनों को चलाया गया और नेटवर्क पर 4,157 ट्रिप्स पूरी की गईं। यानी ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से सुचारू रहा।
सुरक्षा कारणों से 45 स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट रहे सीमित
भले ही ट्रेनें चलती रहीं, लेकिन सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के निर्देशों पर कुछ स्टेशनों पर पाबंदियां लगाई गई थीं। DMRC के मुताबिक, कुल 303 स्टेशनों में से 45 स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वारों को प्रतिबंधित किया गया था। इसका मतलब है कि नेटवर्क का करीब 15% हिस्सा प्रभावित था, जबकि 258 स्टेशन पूरी तरह से चालू थे। इस तनावपूर्ण माहौल का असर यात्रियों की संख्या पर साफ दिखा; जहां एक सामान्य दूसरे शनिवार को करीब 58 लाख लोग सफर करते हैं, वहीं उस दिन यह संख्या घटकर केवल 32 लाख रह गई।
यह पूरा मामला 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शनों से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि वे आम जनता की आवाजाही पर पूरी तरह रोक न लगाएं। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया था कि मेट्रो और रेल जैसी सुविधाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए और किसी भी तरह का प्रतिबंध केवल संविधान के अनुच्छेद 19(2) के दायरे में ही होना चाहिए।
कोर्ट ने स्टेशनों को बंद करने के मामले में दिल्ली प्रशासन को अवमानना नोटिस भी जारी किया है। वहीं, केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय दिया गया है।