DMD पीड़ित बच्चों के लिए मदद की गुहार, दिल्ली में जुटे परेशान माता-पिता
दिल्ली में DMD पीड़ित बच्चों के माता-पिता ने जीवन रक्षक इलाज और वित्तीय सहायता के लिए सरकार से अपील की है।

दिल्ली में 24 अक्टूबर 2026 को एक दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई, जब Duchenne Muscular Dystrophy (DMD) से जूझ रहे बच्चों के माता-पिता अपनी संतानों की जान बचाने के लिए सरकार के सामने एकजुट हुए। ये परिवार अपनी बच्चों के लिए जीवन रक्षक इलाज, वित्तीय सहायता और सरकारी मदद की मांग कर रहे हैं। जेनेटिक बीमारी की वजह से इन बच्चों की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर हो रही हैं, और समय तेजी से निकला जा रहा है।
इस मुहिम की कमान 'Save Our Children Initiative' नामक समूह ने संभाली है। समूह के वरिष्ठ सदस्य राम गोपाल शर्मा और अखिलेश त्रिपाठी ने इस अभियान का नेतृत्व किया। राम गोपाल शर्मा ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा को कई पत्र लिखे, लेकिन अभी तक उनकी पुकार अनसुनी रही है।
इलाज के लिए GST फंड के इस्तेमाल का सुझाव
परेशान माता-पिता अब दिल्ली हाई कोर्ट के पुराने निर्देशों का हवाला दे रहे हैं। उन्होंने सरकार के सामने एक अनोखा प्रस्ताव रखा है कि देश में वसूले जाने वाले GST कलेक्शन के एक छोटे हिस्से को इन बच्चों के इलाज, फिजियोथेरेपी और देखभाल के लिए आवंटित किया जाए। उनकी मांगों की सूची लंबी है, जिसमें शामिल हैं:
- मुफ्त या किफायती दरों पर जीवन रक्षक चिकित्सा उपचार।
- प्रशिक्षित देखभाल करने वालों (Caregivers) की नियमित उपलब्धता।
- प्रभावित परिवारों के लिए मासिक पेंशन की व्यवस्था।
- दवाओं की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकारी शोध।
- सांस लेने में तकलीफ महसूस करने वाले बच्चों के लिए आपातकालीन सहायता।
अखिलेश त्रिपाठी ने जोर देकर कहा कि उनका उद्देश्य केवल इलाज नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि DMD से पीड़ित बच्चे गरिमा के साथ जी सकें और अपनी शिक्षा पूरी कर सकें। उन्होंने बताया कि इलाज का खर्च इतना अधिक है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इसे वहन करना नामुमकिन हो गया है। यह आंदोलन अब देशभर में DMD से जूझ रहे बच्चों के लिए एक ठोस सरकारी नीति बनाने की मांग कर रहा है।