DJB एसटीपी टेंडर घोटाला मामला: कोर्ट ने पूर्व चीफ इंजीनियर की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

Kittu Kumari17 September 20262 min read12 viewsDelhi Local
DJB एसटीपी टेंडर घोटाला मामला: कोर्ट ने पूर्व चीफ इंजीनियर की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) एसटीपी टेंडर घोटाला मामले में पूर्व चीफ इंजीनियर सतीश चंद्र वशिष्ठ की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने विनोद चौहान की अग्रिम जमानत याचिका पर भी सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित कर लिया है। एटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने दोनों याचिकाओं का कड़ा विरोध किया है। विशेष जज दिग विनय सिंह ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने केिसके बाद 21 सितंबर तक के लिए फैसला सुरक्षित कर लिया है। एसीबी का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।जांच एजेंसी के अनुसार, सतीश चंद्र वशिष्ठ साल 2018 से अक्टूबर 2022 तक दिल्ली जल बोर्ड में चीफ इंजीनियर (SDW) के पद पर तैनात थे। वह एसटीपी टेंडर प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक कार्यों के लिए जिम्मेदार थे। एसीबी ने बताया कि वशिष्ठ ने आईएफएएस तकनीक को अपनाने से जुड़े प्रस्ताव शुरू किए और टेंडर की शर्तों को सीमित करने वाले शुद्धिपत्र जारी किए। जांच में सामने आया कि यूरोटेक एनवायर्नमेंटल प्राइवेट लिमिटेड के राजा कुमार कुर्रा ने व्हाट्सएप मैसेज के जरिए नागेंद्र यादव को टेंडर की शर्तों में बदलाव के सुझाव दिए थे। इसके बाद एस.सी. वशिष्ठ ने एक-दो दिन के भीतर उन सुझावों को टेंडर दस्तावेजों में शामिल कर लिया।

विनोद चौहान की अग्रिम जमानत याचिका और वित्तीय लेन-देन का मामला

एसीबी ने विनोद चौहान की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए बताया कि एसटीपी टेंडर की शर्तों को अंतिम रूप देने के दौरान यूरोटेक एनवायर्नमेंटल प्राइवेट लिमिटेड और सृजनहार एंटरप्राइजेस के बीच 22 दिसंबर 2021 को एक समझौता हुआ था। सृजनहार एंटरप्राइजेस विनोद चौहान के भांजे पंकज वर्मा की प्रोप्राइटरशिप फर्म है। एसीबी का आरोप है कि यह समझौता विनोद चौहान के कहने पर किया गया था। इस समझौते के तहत यूरोटेक को मिलने वाली कुल राशि का 3 प्रतिशत हिस्सा सृजनहार एंटरप्राइजेस को मिलना था। जांच में पाया गया कि सृजनहार एंटरप्राइजेस ने कोई काम नहीं किया और यह समझौता केवल कमीशन या रिश्वत की रकम लेने के लिए एक दिखावा था। यूरोटेक द्वारा सृजनहार के बैंक खाते में 2,71,63,130 रुपये ट्रांसफर किए गए, जिसमें से 1.22 करोड़ रुपये धनवाइन इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड को और फिर 81 लाख रुपये विनोद चौहान को मिले।

पर्यावरण मानदंडों में ढील और अन्य आरोपियों की भूमिका

एसीबी ने यह भी आरोप लगाया कि रोहिणी एसटीपी की क्षमता को तकनीकी सिफारिशों के बिना 15 एमजीडी से बढ़ाकर 30 एमजीडी कर दिया गया था। इसके अलावा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के पर्यावरण मानदंडों में ढील दी गई और पीएच, सीओडी (COD) जैसे महत्वपूर्ण अनिवार्य मानदंडों को टेंडर दस्तावेजों से हटा दिया गया। इस मामले में सत्येंद्र कुमार जैन, उद्दी प्रकाश राय, नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा, पंकज वर्मा और अंकित श्रीवास्तव जैसे अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।

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