डीजे का शोर बना काल: सिद्धार्थनगर में 2 दिन के मासूम की मौत, लोगों में गुस्सा
सिद्धार्थनगर में डीजे के कानफोड़ू शोर से 2 दिन के बच्चे की मौत। शोर इतना था कि घरों की छतें तक हिल गईं। पढ़ें पूरी खबर।

देश में सार्वजनिक आयोजनों के दौरान बजने वाले कानफोड़ू डीजे म्यूजिक ने एक बार फिर खौफनाक रूप ले लिया है। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के बधनी इलाके से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां डीजे के शोर के बीच एक दो दिन के मासूम बच्चे की जान चली गई। यह घटना उस समय हुई जब इलाके में दुर्गा मूर्ति विसर्जन का जुलूस निकल रहा था और डीजे की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के घरों की छतें तक हिल रही थीं।
मिली जानकारी के अनुसार, यह मासूम बच्चा 18 अक्टूबर को पैदा हुआ था और 19 अक्टूबर को ही अपनी मां के साथ अस्पताल से घर लौटा था। 21 अक्टूबर को जब विसर्जन जुलूस उनके घर के सामने से गुजरा, तो डीजे के अत्यधिक शोर के कारण बच्चे की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश है और लोग प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं।
शोर का कहर: सिर्फ इंसान ही नहीं, बेजुबान भी हुए शिकार
शोर के कारण होने वाली मौतों का यह कोई पहला मामला नहीं है। हाल ही में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जिन्होंने सबको झकझोर कर रख दिया है। इसी साल मई में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में डीजे की तेज आवाज की वजह से 140 मुर्गियों की मौत हो गई थी, जिनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दिल का दौरा पड़ने की बात कही गई थी। वहीं सितंबर में मध्य प्रदेश के Betul में गणेश विसर्जन के दौरान एक छात्र की मौत की खबर आई थी।
इन घटनाओं के बीच दिल्ली के विकास पुरी में भी 'मिक्सर राइड' हादसे जैसी घटनाएं सामने आई हैं, जो सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा और नियमों की अनदेखी को दर्शाती हैं। सिद्धार्थनगर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है ताकि मौत की सटीक वजह का पता लगाया जा सके।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट समेत कई न्यायिक निकायों ने समय-समय पर सार्वजनिक स्थानों पर शोर प्रदूषण को नियंत्रित करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। लोग अब मांग कर रहे हैं कि डीजे के वॉल्यूम पर सख्त पाबंदी लगाई जाए ताकि किसी और परिवार को ऐसा दुख न झेलना पड़े।