दिवाली शॉपिंग की धूम: जयपुर में ₹1.23 लाख किलो की मिठाई, दिल्ली के बाजारों में उमड़ी भीड़

दिल्ली और जयपुर के बाजारों में दिवाली की भारी भीड़। जयपुर की खास 'त्योहार अशरफी' मिठाई और दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी।

Kittu Kumari5 November 20262 min read0 viewsNational
दिवाली शॉपिंग की धूम: जयपुर में ₹1.23 लाख किलो की मिठाई, दिल्ली के बाजारों में उमड़ी भीड़

दिवाली का त्योहार करीब आते ही दिल्ली और जयपुर के बाजारों में रौनक लौट आई है। लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन इस बार चर्चा केवल कपड़ों और पटाखों की नहीं, बल्कि जयपुर की एक बेहद महंगी और प्रीमियम मिठाई की भी हो रही है। वहीं, दिल्ली के प्रमुख बाजारों में भीड़ इतनी बढ़ गई है कि ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई है, जिसके चलते प्रशासन को कड़े सुरक्षा इंतजाम करने पड़े हैं।

जयपुर की 'त्योहार अशरफी' और दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था

जयपुर में इन दिनों 'त्योहार अशरफी' नाम की मिठाई आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अंजली जैन द्वारा बनाई गई यह मिठाई सोने के सिक्के के आकार की है, जो पुराने समय में सोने के सिक्के भेंट करने की परंपरा से प्रेरित है। इस मिठाई को बादाम, केसर और खाने वाले सोने (edible gold) से तैयार किया गया है। इसकी कीमत सुनकर आप हैरान रह जाएंगे; इसका एक 9 ग्राम का टुकड़ा ₹1,111 का है और 9 टुकड़ों का एक बॉक्स ₹9,999 में मिल रहा है। अगर किलो के हिसाब से देखें तो इसकी कीमत करीब ₹1.23 लाख प्रति किलोग्राम बैठती है।

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दूसरी तरफ, दिल्ली के सदर बाजार, सरोजिनी नगर, करोल बाग और लाजपत नगर जैसे कमर्शियल हब में खरीदारों का सैलाब उमड़ पड़ा है। भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सदर बाजार में फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS), ड्रोन और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दिल्ली-NCR में केवल प्रमाणित 'ग्रीन पटाखों' की बिक्री की अनुमति दी गई है। ये पटाखे 4 से 6 नवंबर तक निर्धारित स्थानों पर बेचे जाएंगे। आम जनता केवल 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे के बीच ही इन पटाखों को चलाने का अधिकार रखेगी।

व्यापारिक नजरिए से देखें तो यह सीजन काफी उम्मीदें जगा रहा है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के मुताबिक, अकेले दिल्ली में इस त्योहारी सीजन का टर्नओवर ₹1 लाख करोड़ से अधिक होने की उम्मीद है, जबकि पूरे देश में यह आंकड़ा ₹7 लाख करोड़ को पार कर सकता है।

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