डायबिटीज है हार्ट अटैक का 'साइलेंट ड्राइवर', समय पर जांच न कराने पर बढ़ता है खतरा: एक्सपर्ट्स

डायबिटीज यानी मधुमेह केवल ब्लड शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं है, बल्कि यह दिल की गंभीर बीमारियों और हार्ट अटैक के लिए एक 'साइलेंट ड्राइवर' की तरह काम करती है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हाई ब्लड शुगर, इंसुलिन रेजिस्टेंस और शरीर में होने वाली सूजन रक्त वाहिकाओं (ब्लड वेसल्स) को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचा सकती है, जिससे हृदय संबंधी जटिलताएं पैदा होती हैं।
सर गंगा राम अस्पताल के हार्ट फेल्योर प्रोग्राम के डायरेक्टर डॉ. अश्विन मेहता ने बताया कि डायबिटीज कैसे हृदय को प्रभावित करती है। उनके अनुसार, जब शरीर में शुगर लेवल बढ़ता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है, तो इससे रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत (एंडोथेलियल फंक्शन) खराब हो जाती है। इसके साथ ही, डायबिटीज के मरीजों में अक्सर कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर भी बढ़ जाता है, जिससे धमनियों में प्लाक जमने का खतरा बढ़ जाता है और हार्ट अटैक की संभावना काफी ज्यादा हो जाती है।
बिना दर्द के आ सकता है हार्ट अटैक
डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे खतरनाक बात यह है कि उन्हें दिल की बीमारी के शुरुआती संकेत नहीं मिलते। मेदांता के सीएमडी डॉ. नरेश त्रेहन ने समझाया कि डायबिटीज के कारण नसों को नुकसान (नर्व डैमेज) पहुँचता है, जिससे दिल से आने वाले दर्द के संकेत दिमाग तक नहीं पहुँच पाते। यानी मरीज का 'अलार्म सिस्टम' फेल हो जाता है और उन्हें सीने में दर्द महसूस नहीं होता, जबकि अंदर ही अंदर दिल को नुकसान पहुँच रहा होता है।
डॉ. मेहता ने एक 45 वर्षीय मरीज का उदाहरण देते हुए बताया कि वह व्यक्ति पेट में गैस की समस्या समझकर इमरजेंसी में आया था, लेकिन ईसीजी और एंजियोग्राफी में पता चला कि उसकी तीनों मुख्य कोरोनरी आर्टरीज पूरी तरह ब्लॉक हो चुकी थीं। वह व्यक्ति 10 साल से डायबिटीज का मरीज था और दवाइयां अनियमित रूप से ले रहा था। उसे पता ही नहीं चला कि उसका दिल इतनी बुरी तरह प्रभावित हो चुका है और अंत में उसे बाईपास सर्जरी करानी पड़ी।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जिन लोगों को डायबिटीज है, उन्हें नियमित रूप से हृदय की जांच करानी चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटीज के मरीजों को एक 'मायोकार्डियल रिस्क इक्विवेलेंट' माना जाना चाहिए, यानी उन्हें ऐसे मरीज की तरह ट्रीट करना चाहिए जिसे पहले से ही दिल की बीमारी हो। इसलिए, साल में कम से कम एक बार इकोकार्डियोग्राम या हार्ट चेकअप जरूर कराना चाहिए ताकि समय रहते खतरे को पहचाना जा सके।