ध्रुव राठी ने लगाया अपहरण का आरोप, दिल्ली में लोकतंत्र मार्च को लेकर भारी तनाव

मशहूर यूट्यूबर और एक्टिविस्ट ध्रुव राठी ने एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उन्हें उनके गुरुग्राम स्थित आवास से अगवा किया गया। ध्रुव राठी के मुताबिक, शनिवार 10 अक्टूबर 2026 को उन्हें उनके घर से उठाया गया और करीब 22 से 24 घंटों तक बिना किसी कानूनी मदद या फोन एक्सेस के रखा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरी घटना के दौरान उन्हें चोटें आईं और पुलिस अधिकारियों ने उनकी मां के साथ धक्का-मुक्की की।
दूसरी ओर, गुरुग्राम पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'निवारक हिरासत' (Preventive Detention) बताया है। पुलिस का कहना है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 और लागू निषेधाज्ञा आदेशों के तहत यह कार्रवाई की गई थी और सभी कानूनी प्रोटोकॉल का पालन किया गया। सोमवार 12 अक्टूबर तक की जानकारी के अनुसार, ध्रुव राठी ने दावा किया है कि उन्हें अनौपचारिक रूप से नजरबंद कर दिया गया है और उनके घर के बाहर करीब 50 पुलिसकर्मी तैनात हैं।
दिल्ली में 'मार्च फॉर डेमोक्रेसी' और सुरक्षा व्यवस्था
एक तरफ जहां ध्रुव राठी की हिरासत को लेकर विवाद बढ़ रहा है, वहीं देश की राजधानी दिल्ली में माहौल काफी तनावपूर्ण है। इंडियन नेशनल कांग्रेस और इंडिया (INDIA) गठबंधन के नेतृत्व में 'मार्च फॉर डेमोक्रेसी' शुरू किया गया है, जो कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया से सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग और सरकार ने इन दावों को नकारते हुए इसे केवल डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाने की एक मानक प्रक्रिया बताया है। इस आंदोलन को युवाओं की 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का भी समर्थन मिल रहा है, जिसके कई नेता पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और वीकेंड पर हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े 20 से अधिक मामले दर्ज किए हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए राजधानी के छह मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने लंबित मुकदमों का हवाला देते हुए विपक्षी नेताओं से मिलने से इनकार कर दिया है, लेकिन प्रशासन को आम जनता की आवाजाही सुनिश्चित करने और अवैध हिरासत रोकने के निर्देश दिए हैं।