दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने मांगी वाहन प्रतिबंधों से छूट, जजों और वकीलों के लिए किया अनुरोध
दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने BS-VI मानकों वाले वाहन प्रतिबंधों से जजों, वकीलों और कोर्ट स्टाफ को छूट देने की मांग की है।

दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए लागू होने वाले नए नियमों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने दिल्ली सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि जजों, वकीलों और कोर्ट के कर्मचारियों को वाहनों पर लगाए जाने वाले नए प्रतिबंधों से राहत मिल सके। यह मांग उस समय आई है जब दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 1 नवंबर से BS-VI मानकों का पालन न करने वाले वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने की घोषणा की है।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एन हरिहरन ने एक्टिंग चीफ जस्टिस को लिखे एक पत्र में अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। उन्होंने बताया कि कानूनी पेशे से जुड़े कई लोग दिल्ली के महंगे घरों के कारण नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद जैसे पड़ोसी शहरों में रहते हैं और रोजाना लंबी दूरी तय करके कोर्ट आते हैं। ऐसे में अगर वाहनों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए, तो न्याय प्रणाली से जुड़े इन लोगों के लिए आवाजाही बेहद मुश्किल हो जाएगी।
न्याय प्रशासन को बताया 'अनिवार्य सेवा'
DHCBA ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि न्यायाधीश, वकील और अदालती कर्मचारी न्याय प्रशासन की एक अनिवार्य सेवा (Essential Service) का हिस्सा हैं। इसलिए, उन्हें इन प्रतिबंधों से मुक्त रखा जाना चाहिए ताकि अदालती कामकाज में कोई बाधा न आए। एसोसिएशन ने अनुरोध किया है कि एक्टिंग चीफ जस्टिस इस मामले को दिल्ली सरकार के समक्ष उठाएं ताकि कानूनी बिरादरी के सदस्यों को बिना किसी परेशानी के आने-जाने की अनुमति मिले।
गौरतलब है कि संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत 1 नवंबर से केवल BS-VI compliant, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। जिन वाहनों के पास वैध PUC सर्टिफिकेट नहीं होगा या जो BS-VI मानकों को पूरा नहीं करेंगे, उन पर पाबंदी होगी। इसके अलावा, गैर-अनुपालन वाले अंतरराज्यीय बसों और उन ट्रकों पर भी रोक होगी जो दिल्ली के अंदर नहीं जा रहे हैं और जिन्हें पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का उपयोग करना होगा।
एसोसिएशन ने यह भी याद दिलाया कि BS-VI मानक 2020 में लागू हुए थे, जबकि उससे पहले के मानकों वाले वाहनों को कुछ निश्चित समय सीमा (डीजल के लिए 10 वर्ष और पेट्रोल के लिए 15 वर्ष) तक चलाने की अनुमति दी गई थी। अब अचानक आए इन कड़े नियमों से कानूनी समुदाय में हड़कंप मचा हुआ है।