दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने मांगी वाहन प्रतिबंध से छूट, वकीलों और जजों के लिए राहत की अपील
दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने जजों और वकीलों को BS-VI वाहन प्रतिबंध से छूट देने की मांग की है।

दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू होने वाले नए वाहन प्रतिबंधों के बीच अब कानूनी बिरादरी ने राहत की मांग की है। वाहन प्रतिबंध से छूट की मांग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने औपचारिक रूप से अनुरोध किया है कि न्यायाधीशों, वकीलों और कोर्ट स्टाफ को इन कड़े नियमों से बाहर रखा जाए।
एसोसिएशन के अध्यक्ष और सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन ने 30 अक्टूबर को दिल्ली के उपराज्यपाल और दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने तर्क दिया कि न्याय प्रशासन में कानूनी बिरादरी एक आवश्यक सेवा प्रदान करती है, इसलिए उन्हें विशेष विचार मिलना चाहिए।
NCR से आने वाले वकीलों की बढ़ी मुश्किल
एन. हरिहरन ने अपनी बात रखते हुए बताया कि बड़ी संख्या में वकील दिल्ली के बाहर के शहरों जैसे नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद से सफर करके कोर्ट आते हैं। उन्होंने इसका कारण दिल्ली में बढ़ती महंगाई और आवास की ऊंची कीमतों को बताया, जिसकी वजह से कई वकीलों के लिए राजधानी में रहना मुश्किल हो गया है। ऐसे में अगर नए प्रतिबंध लागू होते हैं, तो उनके लिए कोर्ट पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।
बता दें कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 30 अक्टूबर को संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत यह घोषणा की थी कि 1 नवंबर, 2026 से केवल BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा करने वाले वाहनों को ही दिल्ली की सड़कों पर चलने की अनुमति होगी।
इस नए नियम के तहत, जो वाहन BS-VI मानकों के अनुरूप नहीं होंगे, उन्हें जब्त किया जा सकता है। ट्रैफिक पुलिस इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए बॉर्डर चेकपॉइंट्स पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) और AI-पावर्ड कैमरों का इस्तेमाल करेगी।
वर्तमान नीति के अनुसार, केवल BS-VI अनुपालन वाले वाहन, CNG, इलेक्ट्रिक और विशेष रूप से छूट प्राप्त वाहनों को ही प्रवेश मिलेगा। इसके अलावा, गैर-अनुपालन वाले अंतरराज्यीय बसों पर प्रतिबंध रहेगा और दिल्ली के बाहर जाने वाले ट्रकों को पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की ओर मोड़ा जाएगा।