वकीलों पर पुलिसिया कार्रवाई: दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने जताया कड़ा विरोध

दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान वकीलों के साथ हुई बदसलूकी और उनकी हिरासत को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने गहरा आक्रोश जताया है। एसोसिएशन ने पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए गए अत्यधिक और असंगत बल की औपचारिक रूप से निंदा की है। यह पूरा मामला कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया के खिलाफ आयोजित प्रदर्शनों के दौरान सामने आया।
DHCBA के अध्यक्ष एन. हरिहरन और मानद सचिव विक्रम सिंह पंवार द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रस्ताव में पुलिस की कार्रवाई को 'पूरी तरह से निंदनीय' बताया गया है। एसोसिएशन ने वीडियो फुटेज का हवाला देते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं और वकीलों को जबरन घसीटा गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि पुलिस कर्मियों ने भारत के संविधान की प्रस्तावना (Preamble) को फाड़ दिया, जो कानून के रखवालों के लिए बेहद शर्मनाक है।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद रिहाई
इस घटनाक्रम के बाद कानूनी जगत में भारी तनाव देखा गया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के समक्ष अपनी गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं। यह भी बताया गया कि कई पुलिस अधिकारियों ने अपनी पहचान आईडी नहीं पहनी थी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए कि हिरासत में लिए गए सभी वकीलों को तुरंत रिहा किया जाए। इस प्रक्रिया में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी मदद की। बता दें कि महेंद्र पार्क पुलिस स्टेशन और छत्रसाल स्टेडियम के पास वकीलों और पुलिस के बीच काफी झड़पें हुई थीं।
सिर्फ वकील ही नहीं, बल्कि दिल्ली भर में पत्रकारों और नागरिक समाज के सदस्यों सहित लगभग 6,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इस सामूहिक हिरासत पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने भी चिंता जताई, हालांकि भारत सरकार ने इसे 'अनावश्यक हस्तक्षेप' बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि पुलिस की कार्रवाई कानूनी दायरे में थी। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी ने रविवार, 11 अक्टूबर को फिर से विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।