RERA नियमों में बदलाव की मांग, धनुका इंफ्रा रियल्टी CEO बोले- प्रोजेक्ट डिलीवरी होगी आसान

रियल एस्टेट सेक्टर में घर खरीदारों के हितों की रक्षा और प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के लिए RERA (रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट) के नियमों में संतुलित सुधार की जरूरत है। यह बात धनुका इंफ्रा रियल्टी लिमिटेड के CEO योगेश धनुका ने कही है। उन्होंने जोर दिया कि रेगुलेटरी अप्रोच ऐसी होनी चाहिए जिससे घर खरीदार तो सुरक्षित रहें ही, साथ ही जिम्मेदार डेवलपर्स को काम करने में आसानी हो।
योगेश धनुका के अनुसार, RERA के अगले चरण में मंजूरी देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट्स की मंजूरी के लिए एक समय सीमा तय हो और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए, ताकि निर्माण कार्य में देरी न हो।
प्रोजेक्ट की रफ्तार बढ़ाने के लिए 'प्रोजेक्ट-सेंसिटिव मैकेनिज्म' का सुझाव
डेवलपर्स के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए CEO ने एस्क्रो प्रावधानों (escrow provisions) में बदलाव की वकालत की है। उन्होंने एक 'प्रोजेक्ट-सेंसिटिव मैकेनिज्म' लागू करने का सुझाव दिया है। इस बदलाव का मकसद यह है कि खरीदारों का पैसा तो सुरक्षित रहे, लेकिन साथ ही डेवलपर्स को सप्लायर्स को एडवांस भुगतान करने की सुविधा मिले। इससे प्रोजेक्ट की रफ्तार बढ़ेगी और वित्तीय अनुशासन भी बना रहेगा।
इसके अलावा, उन्होंने कुछ अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी ध्यान आकर्षित किया:
- कमर्शियल कॉन्फिडेंशियलिटी (व्यावसायिक गोपनीयता) को सुरक्षित रखने के लिए उचित प्रावधान हों।
- अनुपालन (compliance) की शर्तें संतुलित हों ताकि डेवलपर्स और ग्राहकों, दोनों के लिए भविष्य की योजनाएं स्पष्ट रहें।
- अपील करने की प्रक्रिया को संतुलित बनाया जाए ताकि एक निष्पक्ष रेगुलेटरी माहौल तैयार हो सके।
योगेश धनुका ने स्पष्ट किया कि इन सुझावों का उद्देश्य RERA के मूल लक्ष्यों को कम करना नहीं है, बल्कि उन्हें निर्माण क्षेत्र की जमीनी हकीकत के साथ जोड़ना है। उनका मानना है कि यदि कार्यान्वयन ढांचे (implementation framework) में सुधार किया जाता है, तो डिफॉल्ट करने वाले डेवलपर्स पर नकेल कसी जा सकेगी और ईमानदार बिल्डर्स समय पर घर सौंप पाएंगे।