डीजीएचएस मेडिकल खरीद घोटाला: कोर्ट ने राजीव रंगीला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

Kittu Kumari29 September 20263 min read1 viewDelhi Local
डीजीएचएस मेडिकल खरीद घोटाला: कोर्ट ने राजीव रंगीला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

नयी दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को राजीव रंगीला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उन्हें एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) की 4 दिन की हिरासत पूरी होने के बाद अदालत में पेश किया गया था। वह 700 करोड़ रुपये के कथित डीजीएचएस मेडिकल प्रोक्योरमेंट घोटाले में गिरफ्तार किए गए हैं। विशेष न्यायाधीश (ACB) विद्या प्रकाश ने राजीव अरोड़ा उर्फ राजीव रंगीला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है। अब उन्हें 13 अक्टूबर को न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने पर फिर से अदालत में पेश किया जाएगा। एसीबी की ओर से सीनियर पब्लिक प्रसंsecutor कुमार संजय और जांच अधिकारी (IO) धर्मेंद्र पेश हुए। एसीबी ने राजीव रंगीला की 14 दिन की न्यायिक हिरासत के लिए आवेदन दिया था। रंगीला के वकील विक्रम सिंह पंवार ने पेश होकर आईओ द्वारा की गई न्यायिक हिरासत के आवेदन का विरोध नहीं किया।

गिरफ्तारी और विदेश से भागने की कहानी

इससे पहले, 25 सितंबर को राजीव कुमार उर्फ राजीव अरोड़ा उर्फ राजीव रंगीला को अदालत ने एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) की 4 दिन की हिरासत में भेजा था। रंगीला इस मामले का कथित मास्टरमाइंड है और वह गिरफ्तारी से बचने के लिए अमेरिका भाग गया था। भारत लौटने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। उनके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) और गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किए गए थे। एसीबी द्वारा उद्घोषण की प्रक्रिया भी निष्पादित की गई थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि आरोपी के खिलाफ आरोप और बताए गए आधार वर्तमान आरोपी की पुलिस हिरासत रिमांड की मांग को उचित ठहराते हैं। विशेष न्यायाधीश ने 25 सितंबर के आदेश में कहा था कि अदालत इस बात से संतुष्ट है कि वर्तमान आरोपी की गिरफ्तारी इस मामले में उचित है, और आरोपी राजीव कुमार उर्फ राजीव अरोड़ा उर्फ राजीव रंगीला की 4 दिन की पुलिस हिरासत रिमांड के अनुरोध को अनुमति देने के लिए पर्याप्त आधार हैं।

जांच और खरीद में अनियमितताएं

अदालत ने यह भी नोट किया था कि हिरासत की मांग विभिन्न उद्देश्यों के लिए जांच में सहायता के वास्ते की गई थी। इसमें इस मामले में शामिल अपराधों के तौर-तरीकों (Modus Operandi) का पता लगाना शामिल है। इसके अलावा, अपराध में शामिल अन्य लोक सेवकों, निजी व्यक्तियों, निर्माताओं, वितरकों, मध्यस्थों, संस्थाओं आदि की पहचान स्थापित करना है। साथ ही प्रासंगिक दस्तावेजी, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की पहचान और बरामदगी का प्रयास करना तथा विचाराधीन टेंडर से संबंधित प्रासंगिक लापता फाइलों को बरामद करना शामिल है। उप निदेशक सतर्कता द्वारा की गई शिकायत में सीआर रेडियो, एस्थीसिया मशीन, विशेष उपकरण और ओरल डिहाइड्रेशन सॉल्यूशन जैसे चिकित्सा उपकरणों की खरीद में अनियमितता के मामलों का उल्लेख किया गया है। यह भी आरोप है कि इस तौर-तरीके का उपयोग करते हुए, वर्तमान आरोपी ने कथित तौर पर 448 पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की आपूर्ति का आदेश प्राप्त किया, जबकि प्रारंभिक टेंडर केवल 02 मशीनों के लिए था।

अभियोजन और बचाव पक्ष के तर्क

रंगीला की 4 दिन की हिरासत की मांग करते हुए, सीनियर पब्लिक प्रोसिक्यूटर कुमार संजय ने प्रस्तुत किया था कि आरोपी, जो इस मामले में साजिशकर्ताओं में से एक था, शुरुआत में फरार चल रहा था। इस प्रकार इस मामले में लुक आउट सर्कुलर (LOC) और एनबीडब्ल्यू के बाद उद्घोषणा जारी की गई थी। उन्होंने तर्क दिया कि इस मामले में अपराध की साजिश में उसकी भूमिका स्थापित करने, तौर-तरीकों का पता लगाने और अन्य व्यक्तियों की भूमिका की पहचान करने के लिए आरोपी की पुलिस हिरासत की आवश्यकता है। दूसरी ओर, आरोपी के वकील एडवोकेट विक्रम सिंह पंवार ने इस आधार पर हिरासत की प्रार्थना का विरोध किया था कि जांच एजेंसी द्वारा जांच लगभग पूरी कर ली गई है। उन्होंने तर्क दिया कि इस मामले में अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है। उन्होंने आगे तर्क दिया कि चार्जशीट दाखिल किए जाने से यह पता चलता है कि इस मामले में मौखिक या दस्तावेजी अधिकांश साक्ष्य पहले ही एकत्र किए जा चुके हैं। इसलिए जांच एजेंसी द्वारा आरोपी की 4 दिन की पुलिस हिरासत रिमांड का अनुरोध न केवल अत्यधिक अनुचित है, बल्कि जांच एजेंसी द्वारा उचित भी नहीं ठहराया गया है।

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