DGHS मेडिकल खरीद घोटाला: नीरज चोपड़ा की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा- गंभीर है मामला
840 करोड़ के DGHS मेडिकल खरीद घोटाले में आरोपी नीरज चोपड़ा को राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया है।

करीब 840 करोड़ रुपये के कथित DGHS मेडिकल खरीद घोटाले में आरोपी नीरज चोपड़ा को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता और आरोपी की कथित भूमिका को देखते हुए उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया।
नीरज चोपड़ा साल 2022 में सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) में डिप्टी कंट्रोलर अकाउंट्स (DCA) के पद पर तैनात थे। उन्होंने दलील दी थी कि उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, इसलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। हालांकि, स्पेशल जज (ACB) विद्या प्रकाश ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ चार्जशीट दाखिल हो जाने मात्र से कोई आरोपी जमानत का हकदार नहीं हो जाता, खासकर तब जब अपराध की प्रकृति गंभीर हो और न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप की संभावना हो।
साजिश और नियमों के उल्लंघन का आरोप
इस मामले में एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने पूर्व महानिदेशक स्वास्थ्य सेवा (DGHS) वत्सला अग्रवाल, डॉ. विनोद कुमार रंगा और नीरज चोपड़ा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। सुनवाई के दौरान नीरज चोपड़ा के वकील ने तर्क दिया कि दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में उनकी कोई भूमिका नहीं थी और दरों को बढ़ाने का काम अन्य सह-आरोपियों ने किया था।
दूसरी ओर, सीनियर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर कुमार संजय ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि जांच में पर्याप्त सबूत मिले हैं, जो दर्शाते हैं कि आरोपी ने अन्य फर्मों और अज्ञात संस्थाओं के साथ मिलकर साजिश रची। आरोप है कि उन्होंने सरकारी हितों और समाज के खिलाफ जाकर बिडिंग प्रक्रिया में 'कार्टलाइजेशन' को बढ़ावा दिया और GeM पोर्टल के जरिए ई-प्रोक्योरमेंट के नियमों और CVC गाइडलाइंस का उल्लंघन किया।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि सह-आरोपी राजीव कुमार उर्फ राजीव रंगीला और कुछ अन्य अज्ञात कंपनियों के खिलाफ जांच अभी जारी है। इसी वजह से अदालत ने माना कि इस स्तर पर आरोपी जमानत पाने के हकदार नहीं हैं और उनकी याचिका को खारिज कर दिया।