दिल्ली में ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस के नियम बदले, अब छोटे उद्योगों को मिलेगा फायदा
DERC ने ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस के नियमों में बदलाव किया है, जिससे अब छोटे उद्योगों के लिए अक्षय ऊर्जा पाना आसान होगा।

दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं, खासकर कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) ने दिल्ली ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस (GEOA) नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) खरीदना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है।
नए नियमों के मुताबिक, अब ग्रीन एनर्जी का लाभ उठाने के लिए 11 kV वोल्टेज लेवल की अनिवार्यता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। पहले केवल वही उपभोक्ता इस सुविधा का लाभ ले सकते थे जो 11 kV या उससे अधिक वोल्टेज लेवल से जुड़े थे, जिससे कई छोटे और मध्यम उद्योग इस दायरे से बाहर रह जाते थे। अब इस बाधा को हटाकर पात्रता के लिए लोड-आधारित सिस्टम लागू किया गया है।
अब 100 kW लोड वाले उपभोक्ता भी खरीद सकेंगे ग्रीन एनर्जी
नए नियमों के तहत, कोई भी कमर्शियल या इंडस्ट्रियल उपभोक्ता जिसका स्वीकृत लोड या कॉन्ट्रैक्टेड डिमांड 100 kW या उससे अधिक है, वह अब ग्रीन एनर्जी खरीदने के लिए पात्र होगा। खास बात यह है कि इस लोड की शर्त को एक सिंगल कनेक्शन के जरिए या एक ही डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले कई कनेक्शनों को मिलाकर भी पूरा किया जा सकता है। इसके अलावा, कैप्टिव ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए न्यूनतम लोड की सभी शर्तों को भी हटा दिया गया है।
DERC के अधिकारियों का मानना है कि पुराने वोल्टेज-आधारित प्रतिबंधों की वजह से कई योग्य उपभोक्ता इस सुविधा से वंचित थे, जो कि टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल और समान एक्सेस सिस्टम के लक्ष्य के खिलाफ था। इस फैसले से अब MSMEs, टेलीकॉम ऑपरेटर्स और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में रिन्यूएबल एनर्जी को अपनाने की रफ्तार बढ़ेगी।
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा बिजली बिलों में कमी के रूप में देखने को मिलेगा। अनुमान है कि पारंपरिक डिस्कॉम चैनलों के बजाय सीधे रिन्यूएबल सप्लायर्स से बिजली खरीदने पर व्यवसायों के बिजली बिलों में 30 से 40 प्रतिशत तक की कटौती हो सकती है।
इसी कड़ी में, कमीशन ने टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) के ग्रीन एनर्जी ट्रेडिंग पायलट प्रोजेक्ट की समय सीमा को भी बढ़ा दिया है। यह प्रोजेक्ट पीयर-टू-पीयर रिन्यूएबल ट्रांजेक्शन की सुविधा देता है और अब यह 31 मार्च, 2027 तक जारी रहेगा।