साबरमती मॉडल पर संवरेगा दिल्ली का यमुना रिवरफ्रंट, 52 किमी लंबा होगा प्रोजेक्ट

दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी अब एक नया और आधुनिक रूप लेने जा रही है। दिल्ली सरकार ने यमुना के 52 किलोमीटर लंबे हिस्से को पुनर्विकसित करने की एक व्यापक योजना तैयार की है। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए अहमदाबाद के प्रसिद्ध साबरमती रिवरफ्रंट मॉडल को आधार बनाया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन विशेषज्ञों की सलाह ले रहा है और साबरमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SRFDCL) के साथ तकनीकी मार्गदर्शन के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इस प्रोजेक्ट को दो मुख्य चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में पल्ला से वजीराबाद तक के हिस्से को विकसित किया जाएगा, जो एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर काम करेगा। वहीं, दूसरे चरण में वजीराबाद से लेकर ओखला बैराज के पास कालिंदी कुंज तक के क्षेत्र को संवारा जाएगा। इस रिवरफ्रंट पर आम जनता के लिए साइकिलिंग और वॉकिंग ट्रैक, खेल के मैदान, खूबसूरत पार्क और मनोरंजन केंद्र बनाए जाएंगे, ताकि लोग नदी के किनारे सुकून के पल बिता सकें और प्रकृति से जुड़ सकें।
सफाई और बुनियादी ढांचे पर जोर
सिर्फ सौंदर्यीकरण ही नहीं, बल्कि नदी की स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दिल्ली के जल मंत्री परवेश वर्मा ने जानकारी दी कि पिछले 18 महीनों में 37 में से 28 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को अपग्रेड किया जा चुका है, जिससे उपचार क्षमता में 250 मिलियन गैलन प्रतिदिन (MGD) की बढ़ोतरी हुई है। मंत्री का दावा है कि अगले ढाई साल के भीतर पानी की गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
इस मुहिम को गति देने के लिए केंद्र सरकार का सहयोग भी मिल रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 22 अक्टूबर को दिल्ली जल बोर्ड की 43 परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे, जिनकी कुल लागत 8,941.22 करोड़ रुपये है। इन प्रोजेक्ट्स को नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) की मंजूरी मिल चुकी है।
सरकार बुनियादी ढांचे के साथ-साथ लोगों की आदतों में बदलाव लाने की भी कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नदी में पूजा सामग्री और कचरा फेंकने पर रोक लगाने की अपील की है। वहीं, लोगों को यमुना से जोड़ने के लिए "बर्थडे विद यमुना" जैसे अभियान शुरू किए गए हैं। यमुना टास्क फोर्स के सूबेदार रतन सिंह और "चलो यमुना" अभियान के जरिए हजारों वॉलंटियर्स को इस मुहिम से जोड़ा गया है, ताकि नदी की सेहत को लंबे समय तक बरकरार रखा जा सके।