यमुना को स्वच्छ बनाने की बड़ी तैयारी, दिल्ली सरकार अपनाएगी साबरमती रिवरफ्रंट मॉडल

Kittu Kumari20 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
यमुना को स्वच्छ बनाने की बड़ी तैयारी, दिल्ली सरकार अपनाएगी साबरमती रिवरफ्रंट मॉडल

दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी को फिर से जीवित और स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने अब 'वॉर फुटिंग' पर काम शुरू कर दिया है। इस अभियान का मकसद न केवल नदी की गंदगी को साफ करना है, बल्कि लोगों को यमुना से भावनात्मक रूप से जोड़ना भी है। इसी कड़ी में जल मंत्री प्रवेश सहिब सिंह ने एक अनोखी पहल 'बर्थडे विद यमुना' की शुरुआत की है, जिसके तहत लोग घाटों पर बने विशेष हट्स में अपना जन्मदिन मना सकेंगे। मंत्री सिंह खुद 7 नवंबर को यमुना घाट पर अपना जन्मदिन मनाकर इस मुहिम की शुरुआत करेंगे।

साबरमती की तर्ज पर संवरेगा रिवरफ्रंट, करोड़ों का निवेश

यमुना के कायाकल्प के लिए दिल्ली प्रशासन गुजरात के साबरमती रिवरफ्रंट मॉडल को आधार बना रहा है। इसके लिए साबरमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के साथ एक समझौता (MoU) अंतिम चरण में है। इस पूरी विकास योजना को दो हिस्सों में बांटा गया है—पहला हिस्सा पल्ला से वजीराबाद तक और दूसरा हिस्सा वजीराबाद से कालिंदी कुंज या ओखला बैराज क्षेत्र तक होगा।

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इस बड़े मिशन को रफ्तार देने के लिए बुनियादी ढांचे पर भारी निवेश किया जा रहा है। 22 अक्टूबर 2024 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली जल बोर्ड के 43 प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे, जिनकी कुल कीमत 8,941.22 करोड़ रुपये है। इसमें 10 पुराने प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और 33 नए प्रोजेक्ट्स की नींव रखी जाएगी।

योजना की मुख्य बातें:

  • ओखला में 1,161 करोड़ रुपये की लागत से 124 MGD का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बनाया जाएगा।
  • 8 मौजूदा STPs को 1,041 करोड़ रुपये खर्च कर अपग्रेड किया जाएगा, जिससे 78.5 लाख लोगों को फायदा होगा।
  • 358 अनधिकृत कॉलोनियों और 113 गांवों में 29 डिसेंट्रलाइज्ड STP और पंपिंग स्टेशन लगाए जाएंगे।
  • चंद्रवल में 477 MLD का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित होगा और 1,034 किमी का सीवर नेटवर्क बिछाया जाएगा।

सरकार का लक्ष्य है कि अगले ढाई साल के भीतर यमुना में गिरने वाले अनुपचारित गंदे पानी (untreated wastewater) को पूरी तरह रोका जाए। गौरतलब है कि हाल ही में 18 अक्टूबर 2024 को 'चलो यमुना' अभियान चलाया गया था, जिसमें 35,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने 70 घाटों से करीब 76,755 किलो कचरा इकट्ठा कर अपनी जागरूकता का परिचय दिया था।

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