दिल्ली की हवा हुई जहरीली, 287 दिनों का सबसे खराब AQI रिकॉर्ड
दिल्ली की हवा जहरीली हुई, AQI 350 के पार पहुंचा। पराली जलाने और मौसम के असर से स्थिति बिगड़ी, CAQM ने GRAP-2 के कड़े नियम लागू किए।

राजधानी दिल्ली एक बार फिर प्रदूषण की चपेट में है। मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को दिल्ली की वायु गुणवत्ता पिछले 287 दिनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 350 दर्ज किया गया, जिसे 'बहुत खराब' श्रेणी में रखा गया है। हालत इतनी बिगड़ गई कि शाम 4 बजे तक शहर के 10 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा की स्थिति 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में पहुंच गई।
प्रदूषण का सबसे बुरा असर जहांगीरपुरी में देखा गया, जहां AQI 462 तक जा पहुंचा। इसके अलावा पंजाबी बाग (445), रोहिणी (442), DTU (438), मुंडका (429), अलीपुर (428), विवेक विहार (424), नरेला (420), बवाना (415), आईआईटी दिल्ली (411) और नॉर्थ कैंपस (401) जैसे इलाकों में हवा बेहद जहरीली रही।
पराली और मौसम ने बढ़ाई मुसीबत, GRAP-2 लागू
हवा में इस जहर का एक बड़ा कारण पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना है। आंकड़ों के मुताबिक, 3 नवंबर को पंजाब में सीजन की सबसे अधिक 584 आग की घटनाएं दर्ज की गईं। डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के अनुसार, दिल्ली के प्रदूषण में पराली का योगदान करीब 15.3% रहा, जिसके 4-5 नवंबर तक 20% से ऊपर जाने की आशंका है। साथ ही, कम तापमान और हवा की धीमी रफ्तार ने प्रदूषकों को जमीन के करीब रोक दिया है, जिससे धुंध और स्मॉग का असर बढ़ गया है।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 2 नवंबर से पूरे NCR में GRAP-2 (Graded Response Action Plan) लागू कर दिया है। 1 नवंबर से 28 फरवरी 2027 तक चलने वाले इन नियमों के तहत कई सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं:
- धूल पैदा करने वाली निर्माण गतिविधियों पर पूरी तरह रोक।
- दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-IV या उससे पुराने वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी।
- पार्किंग शुल्क को दोगुना कर दिया गया है।
- सरकारी और निजी कार्यालयों में फिजिकल अटेंडेंस को 50% तक सीमित किया गया है।
दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के लिए केवल 'ग्रीन पटाखों' के इस्तेमाल की अनुमति दी है, जो 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे के बीच ही चलाए जा सकेंगे। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के मुताबिक, दिल्ली-NCR में 9 नवंबर तक हवा 'बहुत खराब' से 'गंभीर' श्रेणी में बनी रह सकती है। इस बीच, पराली प्रबंधन को लेकर दिल्ली और पंजाब सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है।