दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़े बदलाव: सुप्रीम कोर्ट की फटकार और सरकार के नए कदम

दिल्ली में हाल ही में हुई यौन हिंसा की घटनाओं ने सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को तेज कर दिया है। सितंबर 2026 तक, आस्था कुंज पार्क में एक 17 साल की लड़की के साथ कथित तौर पर गैंगरेप, कक्षा 6 की छात्रा, एक 7 साल की बच्ची और दिल्ली विश्वविद्यालय की दो छात्राओं छात्राओं के साथ हुई घटनाओं ने पूरे देश में बहस छेड़ दी है।
- सुप्रीम कोर्ट ने इन अपराधों का स्वतः संज्ञान (suo motu) लिया है।
- दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने 'हम औरतें आजाद हैं' और 'चलो डीयू: मार्च फॉर विमेन सेफ्टी' जैसे विरोध प्रदर्शन किए हैं।
- दिल्ली पुलिस और डीडीए द्वारा सुरक्षा ऑडिट और सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं।
- मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की कैबिनेट ने 'दुर्गा' (DURGA) योजना के तहत 1,300 पिंक ई-ऑटो चलाने की मंजूरी दी है।
- एलजी तरणजीत सिंह संधू ने 'ऑपरेशन शिष्टाचार' और 'पिंक फोर्स' की शुरुआत की है।
सुप्रीम कोर्ट और छात्र संगठनों की मांग
28 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय अधिकारियों की 'ढुलमली गश्त' और 'प्रशासनिक खामियों' की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पार्क और बसें जैसे सार्वजनिक स्थान जोखिम वाले क्षेत्र नहीं होने चाहिए। इसी बीच, दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने बेहतर स्ट्रीट लाइट, साफ-सफाई और बेहतर शटल सेवाओं की मांग को लेकर 'हम औरतें आजाद हैं' मार्च निकाला। साथ ही, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) ने 'चलो डीयू: मार्च फॉर विमेन सेफ्टी' का समर्थन किया।
सरकारी एजेंसियां और पुलिस की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने पूरे शहर की स्ट्रीट लाइट और सीसीटीवी बुनियादी ढांचे की समीक्षा का आदेश दिया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) सुरक्षा ऑडिट कर रहा है, सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ा रहा है और सूर्यास्त के बाद पार्कों में प्रवेश सीमित कर रहा है। इसके अलावा, एलजी तरणजीत सिंह संधू ने पुलिस को छेड़छाड़ के खिलाफ 'ऑपरेशन शिष्टाचार' शुरू करने और प्रशिक्षित महिला अधिकारियों की 'पिंक फोर्स' बनाने का निर्देश दिया गया है।
परिवहन और रोजगार के नए नियम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की कैबिनेट ने 23 सितंबर 2026 को DURGA (Driving Upliftment and Rozgar for Women/Transgender Green e-Auto) योजना को मंजूरी दी, जिसके तहत महिलाओं और ट्रांसजेंडर के लिए 1,300 पिंक ई-ऑटो तैनात किए जाएंगे। यह कदम दिल्ली शॉप्स एंड एस्टेब्लिशमेंट (संशोधन) अधिनियम, 2026 के साथ आता है, जो महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति देता है, बशर्ते कि सीसीटीवी और सुरक्षित परिवहन जैसे सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाए। यह मौजूदा श्रम कानूनों और PoSH एक्ट के साथ लागू होगा।
अपराध के आंकड़े और विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं का मानना है कि व्यक्तिगत तैयारी से ज्यादा बुनियादी ढांचे में सुधार प्राथमिकता होनी चाहिए। आलोचकों का तर्क है कि 'पिंक जोन' जैसे कदम हिंसा के मूल कारणों को खत्म नहीं करते हैं। 2024 के अपराध आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ 13,396 अपराध और 1,058 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए, जबकि बच्चों के खिलाफ 7,662 अपराध हुए, जो कि महानगरों में सबसे अधिक है।