दिल्ली की महिलाओं और क्वीर समुदाय ने सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षा के लिए निकाली मिडनाइट नाइट वॉक

दिल्ली में महिलाओं और क्वीर समुदाय के लोगों ने 'डरना मना है' अभियान के तहत नाइट वॉक निकाली। इसका उद्देश्य यह साबित करना है कि रात के समय भी सार्वजनिक जगहें महिलाओं के लिए असुरक्षित नहीं हैं। यह पहल 'वुमन वॉक एट मिडनाइट' के रूप में जानी जाती है और महिलाओं की आवाजाही पर सामाजिक पाबंदियों के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन है। इस आंदोलन की शुरुआत साल 2016 में थिएटर आर्टिस्ट मल्लिका तनेजा ने की थी। अब यह चंडीगढ़, बेंगलुरु, गुवाहाटी, फरीदाबाद, जयपुर और नेपाल के काठमांडू तथा दमक तक फैल चुका है। बिना टिकट और बिना प्रायोजन वाले ये वॉक उन लोगों द्वारा और उनके लिए आयोजित किए जाते हैं जो महिला के रूप में पहचान रखते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य रात में शहरी सड़कों पर चलने के अपने मौलिक अधिकार को जताना है। दिल्ली में यह हालिया आयोजन 27 सितंबर 2026 की रात को हुआ, जिसकी शुरुआत 26 सितंबर को कालकाजी में हुई थी। यह आंदोलन राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा और सरकारी नीतियों पर चल रही व्यापक चर्चाओं के बीच हो रहा है।