नई दिल्ली में महिलाओं और छात्रों का बड़ा प्रदर्शन, सुरक्षा और पाबंदियों के खिलाफ फूटा गुस्सा

Kittu Kumari30 September 20261 min read1 viewDelhi Local
नई दिल्ली में महिलाओं और छात्रों का बड़ा प्रदर्शन, सुरक्षा और पाबंदियों के खिलाफ फूटा गुस्सा

नई दिल्ली में महिलाओं और छात्रों ने बलात्कार के मामलों में वृद्धि के खिलाफ बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया है। 21 सितंबर 2026 को कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के कथित सामूहिक बलात्कार के बाद यह विरोध शुरू हुआ। 28 सितंबर को प्रदर्शन तब अपने चरम पर पहुंच गया जब दिल्ली विश्वविद्यालय, मिरांडा हाउस और लेडी श्री राम कॉलेज के सैकड़ों छात्रों ने मार्च निकाला। स्रोतों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने के बजाय सुरक्षित सार्वजनिक स्थानों की मांग की।

न्यायपालिका और प्रशासन की कार्रवाई

इस विरोध के बीच भारत के सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने सुरक्षित सार्वजनिक क्षेत्र बनाए रखने में कानून प्रवर्तन की विफलता की आलोचना की है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली पुलिस, दिल्ली विकास प्राधिकरण और नगर निगम को पार्कों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट करने का आदेश दिया है। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने शहर भर में स्ट्रीट लाइट और सीसीटीवी कवरेज की समीक्षा करने का निर्देश दिया है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और नेताओं के बयान

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रशासनिक कमियों को स्वीकार करते हुए सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने का वादा किया है। राजनीतिक नेताओं ने सरकार की प्रतिक्रिया पर अलग-अलग विचार रखे हैं। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि 2.62 लाख सीसीटीवी कैमरों और 2.80 लाख स्ट्रीट लाइटों में से आधे से अधिक खराब पड़े हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 29 सितंबर को छात्र प्रदर्शनों का समर्थन किया। सुप्रीम कोर्ट 5 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक सुरक्षा-ऑडिट रिपोर्ट की समीक्षा करेगा।

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