नई दिल्ली में महिलाओं का बड़ा प्रदर्शन, बलात्कार की घटनाओं और पाबंदियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्र

नई दिल्ली में महिलाओं और छात्रों ने बलात्कार के मामलों में वृद्धि के खिलाफ बड़े पैमाने पर सड़कों पर प्रदर्शन किया है। 21 सितंबर 2026 को कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के कथित सामूहिक बलात्कार के बाद यह विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। 28 सितंबर को प्रदर्शन तब अपने चरम पर पहुंच गया जब दिल्ली विश्वविद्यालय, मिरांडा हाउस और लेडी श्री राम कॉलेज के सैकड़ों छात्रों ने मार्च निकाला और आवाजाही पर पाबंदियों के बजाय सुरक्षित सार्वजनिक स्थानों की मांग की।प्रदर्शनकारियों ने ऐसे नारे लगाए और सोशल मीडिया पर एक बड़ा अभियान चलाया।
इस अशांति के जवाब में, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की अगुवाई में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और सुरक्षित सार्वजनिक क्षेत्र बनाए रखने में कानून प्रवर्तन की विफलता के लिए अधिकारियों की आलोचना की। दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने दिल्ली पुलिस, दिल्ली विकास प्राधिकरण और दिल्ली नगर निगम को पार्कों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट करने का आदेश दिया है, जबकि पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने सड़क की रोशनी और सीसीटीवी कवरेज की शहरव्यापी समीक्षा अनिवार्य कर दी है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रशासनिक कमियों को स्वीकार किया और सुरक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का वादा किया।
राजनीतिक नेताओं ने राज्य की प्रतिक्रिया पर अलग-अलग विचार व्यक्त किए हैं। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मौजूदा बुनियादी ढांचे को बनाए रखने में विफल रहने के लिए वर्तमान सरकार की आलोचना की और आरोप लगाया कि 2.62 लाख सीसीटीवी कैमरों और 2.80 लाख स्ट्रीट लाइटों में से आधे से अधिक खराब पड़े हैं। इस बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 29 सितंबर को छात्र प्रदर्शनों का समर्थन किया और जोर देकर कहा कि राज्य को महिलाओं की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने के बजाय अपराधियों को दंडित करने पर ध्यान देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 5 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक सुरक्षा-ऑ ऑडिट रिपोर्ट की समीक्षा करने की उम्मीद है। अधिक जानकारी के लिए ANI News पर जाएं।