दिल्ली में रात की पाली में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा पर रिपोर्ट

Kittu Kumari26 September 20262 min read5 viewsDelhi Local
दिल्ली में रात की पाली में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा पर रिपोर्ट

दिल्ली-एनसीआर में रात की पाली में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चुनौतियां सामने आई हैं। 26 सितंबर 2026 को टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, नर्स, कॉल सेंटर कर्मी, एयरलाइंस स्टाफ, होटल कर्मी, डिलीवरी पार्टनर और पत्रकार के रूप में काम करने वाली महिलाएं सुबह तड़के शहर में आवाजाही करती हैं और सुरक्षित रास्ता पाना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। 43 वर्षीय कैब ड्राइवर शादिना खत्री का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि वह सुनसान रास्तों पर गाड़ी चलाते समय यात्रियों के विवरण की जांच करने समेत पूरी सतर्कता बरतती हैं।

इस मामले से जुड़े कानूनी नियमों में काफी बदलाव किए गए हैं। दिल्ली दुकानें और स्थापना (संशोधन) अधिनियम 2026, जो 30 अप्रैल 2026 को लागू हुआ, महिलाओं को गर्मियों में रात 9 बजे से सुबह 7 बजे और सर्दियों में रात 8 बजे से सुबह 8 बजे के बीच नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति देता है। उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना द्वारा अनुमोदित इस कानून के तहत नियोक्ताओं के लिए लिखित सहमति फॉर्म, पर्याप्त सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षा और परिवहन सुविधाएं देना अनिवार्य किया गया है। ये जरूरतें 8 मई 2026 को अधिसूचित व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति (केंद्रीय) नियम 2026 और अक्टूबर 2025 की दिल्ली सरकार की अधिसूचना द्वारा समर्थित हैं, जिसमें ओवरटाइम के लिए दोगुना वेतन और आंतरिक शिकायत समितियों के गठन का निर्देश है।

इन नियमों के बावजूद सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। 25 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक संपादकीय में बताया गया कि दिल्ली में 2024 के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराध के 13,396 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 1,058 बलात्कार के मामले शामिल थे। विशेषज्ञों का तर्क है कि कानूनी सुरक्षा तो मौजूद है लेकिन व्यावहारिक रूप से इसका क्रियान्वयन कम है। उन्होंने बेहतर स्ट्रीट लाइट, काम करने वाले सीसीटीवी कैमरे, भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन और नियमित सुरक्षा ऑडिट की आवश्यकता बताई है।

सुरक्षा चिंताओं के जवाब में दिल्ली पुलिस ने 24 सितंबर 2026 से मुख्य मार्गों पर 'लेडीज स्पेशल' बसों में महिला कर्मियों को तैनात करना शुरू किया। 26 सितंबर 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों और एबीवीपी ने अधिक पुलिस गश्त, समर्पित सहायता बूथ और शहर के अंधेरे स्थानों के ऑडिट सहित बेहतर सुरक्षा की मांग करते हुए प्रदर्शन किए। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख लगातार बना हुआ है कि महिलाओं के नाइट शिफ्ट में काम करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना अमान्य है, जिससे सभी कामगारों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर है।

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel
Share:

Comments

Leave a comment