दिल्ली-एनसीआर में नर्सिंग, एविएशन, कॉल सेंटर, हॉस्पिटैलिटी, डिलीवरी और पत्रकारिता जैसे क्षेत्रों में नाइट शिफ्ट करने वाली हजारों महिलाओं के सामने सुरक्षा की बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। 26 सितंबर 2026 तक की स्थिति के अनुसार, महिलाएं देर रात घर लौटने के दौरान इन खतरों का सामना कर रही हैं। महिलाएं जोखिम को कम करने के लिए कंपनी की गाड़ी, सुरक्षा गार्ड और लाइव-लोकेशन शेयरिंग जैसे उपायों पर निर्भर हैं। हाल ही में 24 सितंबर 2026 को आस्थ कुंज पार्क में हुई कथित गैंगरेप की घटना ने सार्वजनिक जगहों पर खराब रोशनी, काम न करने वाले सीसीटीवी कैमरे और पुलिस गश्त की कमी जैसी गंभीर समस्याओं को फिर से उजागर कर दिया है।
दिल्ली दुकान और स्थापना (संशोधन) अधिनियम, 2026 के लागू होने के बाद विधिक स्थिति में बदलाव आया है, जिसके तहत महिलाओं को सभी संस्थानों में नाइट शिफ्ट में काम करने की औपचारिक अनुमति मिल गई है। जुलाई 2025 में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा शुरुआती मंजूरी और अक्टूबर 2025 में उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना की सहमति के बाद, इस अधिनियम को 23 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली और 13 मार्च 2026 को इसकी अधिसूचना जारी की गई।
यह कानून 30 अप्रैल 2026 से 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों पर लागू हो गया है। नए नियमों के तहत, नियोक्ताओं को नाइट शिफ्ट के लिए महिला कर्मचारियों की पहले से लिखित सहमति लेनी होगी।
सुरक्षा जरूरतों के तहत हर समय कम से कम दो महिला कर्मचारियों की मौजूदगी, पर्याप्त सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षा इंतजाम और ठेका कर्मचारियों समेत सभी स्टाफ के लिए गाड़ी की गारंटी होना अनिवार्य है।
यह कानून कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन करना अनिवार्य बनाता है। काम करने की स्थितियों को लेकर यह अधिनियम प्रति दिन अधिकतम नौ घंटे या प्रति सप्ताह 48 घंटे काम की सीमा तय करता है, जिसमें ब्रेक से पहले छह घंटे से अधिक लगातार काम की अनुमति नहीं है। कानून में ओवरटाइम और राष्ट्रीय छुट्टियों पर काम करने पर दोगुना वेतन देने का प्रावधान है।