दिल्ली की महिला ने UPI छोड़कर अपनाया कैश, फिजूलखर्च में आई भारी कमी

दिल्ली की रहने वाली कंटेंट क्रिएटर सदफ ने UPI (Unified Payments Interface) का इस्तेमाल बंद करके कैश पेमेंट करना शुरू किया, जिससे उनका फिजूलखर्च आधा हो गया। 31 जुलाई 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, सदफ ने इंस्टाग्राम वीडियो में बताया कि दो महीने तक डिजिटल ट्रांजैक्शन से दूर रहने पर उनकी खर्च करने की आदतें पूरी तरह बदल गईं। उन्होंने इसे अपनी "पिछले 6 महीनों की सबसे बड़ी उपलब्धि" बताया है। उनका कहना है कि फिजिकल मनी की वजह से उन्हें हर ट्रांजैक्शन का अहसास हुआ, जिससे फालतू खर्च कम हुआ।
विशेषज्ञों की राय और मनोवैज्ञानिक प्रभाव
फाइनेंशियल एडवाइजर स्नेहाशीष दास का कहना है कि कैश पेमेंट से होने वाले 'पेन ऑफ पेइंग' (भुगतान का दर्द) की वजह से खर्चों पर लगाम लगती है, जो डिजिटल ट्रांजैक्शन में गायब रहता है। POP UPI के फाउंडर भार्गव एर्रांगी ने बताया कि UPI के आसान डिजाइन की वजह से पेमेंट करना बेहद आसान और तेज हो गया है, जिससे भुगतान का अहसास 'गायब' हो जाता है और खर्च करना हल्का महसूस होता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी माना है कि डिजिटलाइजेशन से फाइनेंशियल एक्सेसिबिलिटी बढ़ती है, लेकिन इससे इम्पल्सिव स्पेंडिंग (बिना सोचे-समझे खर्च) भी बढ़ सकती है।
रिसर्च और नया 80:20 फॉर्मूला
हर्षल देव, राज गुप्ता और ध्रुव कुमार के एक स्टडी के मुताबिक, लगभग 75% लोगों ने माना कि UPI की वजह से उनका खर्च बढ़ा है, जबकि सिर्फ 7% लोगों का खर्च घटा है। RBI की 'रिपोर्ट ऑन करेंसी एंड फाइनेंस (RCF) 2023-24' में भी कहा गया है कि तेज फाइनेंशियल ट्रेंड्स के कारण डिजिटलाइजेशन से फिजूलखर्च बढ़ता है। इन अनुभवों के आधार पर, PIB की रिपोर्ट के अनुसार अब सदफ 80:20 का तरीका अपना रही हैं, जिसमें वह 80% खर्च कैश से और जरूरत पड़ने पर ही UPI का इस्तेमाल करती हैं। इस तरीके ने डिजिटल पेमेंट के असर पर ऑनलाइन बड़ी चर्चा छेड़ दी है।