दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए केंद्र सरकार और दिल्ली के अधिकारियों ने मिलकर एक अनिवार्य सर्दी का प्रोटोकॉल तैयार किया है। इस नई योजना की घोषणा 28 सितंबर 2026 को पर्यावरण भवन में हुई बैठक में की गई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की। इस योजना में वाहनों की आवाजाही, दफ्तरों में कर्मचारियों की संख्या और निर्माण कार्यों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, The Hindu, The Indian Express, Bloomberg, Business Today, DD India और ANI ने पुष्टि की है कि यह पैकेज वाहन से निकलने वाले धुएं, दफ्तरों की भीड़ और निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के प्रदूषण का 30 प्रतिशत हिस्सा शहर के भीतर से जबकि 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा आसपास के एनसीआर क्षेत्रों से आता है।
1 अक्टूबर 2026 से 500 ईंधन स्टेशनों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक के जरिए सख्त जांच शुरू होगी। जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र नहीं होगा या जो पेट्रोल के लिए 15 वर्ष और डीजल के लिए 10 वर्ष से पुराने होंगे, उन्हें ईंधन नहीं दिया जाएगा। 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 के बीच दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड ऐसे सभी पेट्रोल और डीजल वाहनों पर प्रतिबंध रहेगा जो बीएस-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं। इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों, सीएनजी मॉडल, आपातकालीन सेवाओं और सरकारी ड्यूटी वाले वाहनों को छूट दी गई है। इस अवधि के दौरान सार्वजनिक और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति 50 प्रतिशत तक सीमित करनी होगी। इसके अलावा, दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक और नगर निगम के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक चलेंगे।
निर्माण गतिविधियों पर अधिक सख्त समयसीमा लागू की गई है। धूल उड़ाने वाली सभी तोड़फोड़ और बाहरी सिविल गतिविधियों पर 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक रोक रहेगी। 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 के बीच निर्माण और तोड़फोड़ पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा और इस दौरान रेत, पत्थर व सीमेंट ढोने वाले वाहनों के प्रवेश पर भी रोक होगी। आवश्यक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को इन प्रतिबंधों से छूट दी गई है। राजधानी में पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया गया है, हालांकि दिल्ली मेट्रो द्वारा संचालित पार्किंग स्थल इससे बाहर हैं।
India Today की 29 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा कर्मचारियों के लिए इलेक्ट्रिक हीटिंग बूथ जैसी नई चीजें शामिल की गई हैं। अधिकारियों द्वारा प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए 98 मशीनीकृत सड़क सफाई मशीनों का उपयोग किया जाएगा और 3,065 किलोमीटर सड़क के पुनर्विकास का लक्ष्य रखा गया है।