दिल्ली में सर्दियों के मौसम में प्रदूषण को रोकने के लिए नगर निगम और दिल्ली सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। दिल्ली सरकार ने 2026-27 के लिए नए विंटर एक्शन प्लान की घोषणा की है, जिसके तहत प्रदूषण से निपटने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं। इस योजना के बारे में अधिक जानकारी यहाँ देखें।
मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को एमसीडी की हाउस कमेटी की बैठक हुई, जिसमें सभी दलों के पार्षदों ने प्रदूषण से निपटने के लिए आक्रामक रणनीतियों की मांग की।
सरकार की नई योजना के तहत 70 मैकेनिकल रोड-स्वीपिंग मशीनें खरीदने की मंजूरी दी गई है, जिसमें 45 छोटी और 32 बड़ी मशीनें शामिल हैं। इसके अलावा आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर 19.22 करोड़ रुपये की लागत से पांच साल की रियल-टाइम प्रदूषण निगरानी परियोजना को मंजूरी दी गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार प्रदूषण को पूरे साल की चुनौती मान रही है और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सरसा ने विभागों के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करने पर जोर दिया है।
प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए 1 अक्टूबर 2026 से 500 पेट्रोल पंपों पर 'नो पीयूसीसी, नो फ्यूल' अभियान शुरू किया जाएगा।
1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक धूल उड़ाने वाले विध्वंस और बाहरी निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी, और 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 तक सभी प्रकार के निर्माण कार्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली से बाहर के नॉन-बीएस-VI वाहनों के प्रवेश पर रोक होगी और पार्किंग फीस को दोगुना कर दिया जाएगा।
धूल और स्वच्छता से निपटने के लिए एमसीडी ने हर वार्ड में 1,000 स्वच्छता कर्मचारियों को तैनात करने की मंजूरी दी है।
सरकारी दफ्तरों के समय में भी बदलाव किया गया है, जिसके तहत एमसीडी के दफ्तर सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के दफ्तर सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक चलेंगे। नवंबर से फरवरी के बीच 50 प्रतिशत वर्क-फ्रॉम-होम की योजना भी बनाई गई है। चर्चा के दौरान पार्षदों ने खुले में कचरा जलाने पर कड़े जुर्माने और श्मशानों में गोबर के उपले इस्तेमाल करने जैसे कई सुझाव दिए।