दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण: सरकार का विंटर एक्शन प्लान लागू, WFH और गाड़ियों पर लगी पाबंदी

जैसे-जैसे नवंबर का महीना शुरू हुआ है, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर जहरीली हवा की चपेट में आने लगी है। हवा की घटती रफ्तार और मौसम के बदलते मिजाज ने प्रदूषण के स्तर को बढ़ा दिया है, जिससे निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने एक सख्त 'विंटर एक्शन प्लान' तैयार किया है। शहर की भौगोलिक बनावट और 'इनवर्जन लेयर' के कारण प्रदूषक तत्व हवा में ऊपर नहीं जा पा रहे हैं और एक ढक्कन की तरह शहर को ढके हुए हैं, जिससे सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है।
अक्टूबर के मध्य से ही वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई इलाकों में 200 के पार पहुंच गया है। डॉक्टरों का कहना है कि अक्टूबर से ही सांस संबंधी समस्याओं में 30 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने 1 नवंबर से कई कड़े कदम उठाने का फैसला किया है।
इन नियमों का करना होगा पालन, वरना होगी कार्रवाई
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने निम्नलिखित उपाय लागू किए हैं:
- वर्क फ्रॉम होम: 1 नवंबर से 31 जनवरी तक सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क-फ्रॉम-होम पॉलिसी लागू होगी।
- वाहनों पर पाबंदी: BS-IV और उससे पुराने कम उत्सर्जन वाले कमर्शियल वाहनों के प्रवेश पर सख्त रोक रहेगी, हालांकि दिल्ली में रजिस्टर्ड वाहनों को इससे छूट दी गई है।
- पार्किंग फीस में बढ़ोतरी: सड़कों पर भीड़ कम करने के लिए 1 नवंबर से 28 फरवरी तक पार्किंग शुल्क को दोगुना कर दिया गया है।
- निर्माण कार्यों पर रोक: धूल और मलबे को रोकने के लिए 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 तक सभी तरह के तोड़-फोड़ और निर्माण कार्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने हाल ही में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण किया, जहां 13 नए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों की कार्यप्रणाली को देखा गया। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए EV पॉलिसी 2.0 पहले से ही लागू है। हालांकि 2016 के मुकाबले प्रदूषण के आंकड़ों में कुछ सुधार दिखा है, लेकिन पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आपातकालीन उपायों से काम नहीं चलेगा, बल्कि बुनियादी ढांचे में दीर्घकालिक सुधार की जरूरत है।