दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए विंटर एक्शन प्लान लागू, निर्माण कार्यों पर रहेगी पाबंदी
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण रोकने के लिए विंटर एक्शन प्लान 2026-27 लागू किया है। जानें निर्माण कार्यों पर पाबंदी और नए नियमों के बारे में।

राजधानी दिल्ली में हर साल सर्दियों में गहराने वाले प्रदूषण के संकट से निपटने के लिए सरकार ने दिल्ली विंटर एक्शन प्लान 2026-27 का खाका तैयार कर लिया है। यह विशेष अभियान 1 नवंबर 2026 से शुरू होकर 28 फरवरी 2027 तक चलेगा। शहर में धूल और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए इस बार बेहद सख्त कदम उठाए गए हैं। हाल ही में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 164 से 187 के बीच दर्ज किया गया, जिसे 'मध्यम' श्रेणी में रखा गया है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने इस सुधार का श्रेय सामूहिक प्रयासों को दिया है, लेकिन साथ ही क्षेत्रीय समन्वय की जरूरत पर भी जोर दिया है।
निर्माण कार्यों पर रोक और सख्त निगरानी
नए नियमों के मुताबिक, धूल उड़ाने वाले विध्वंस और बाहरी सिविल निर्माण कार्यों पर 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक रोक रहेगी। सबसे सख्त पाबंदी 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 के बीच लागू होगी, जिसमें इस तरह की सभी गतिविधियों पर पूरी तरह बैन होगा। निगरानी के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है; 500 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण स्थलों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग दिल्ली सरकार के 'डस्ट पोर्टल' और AI कैमरों के जरिए की जाएगी। वहीं, धूल नियंत्रण में लापरवाही बरतने पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने दिल्ली जल बोर्ड, NHAI, DMRC और NBCC को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
प्रदूषण कम करने के लिए बुनियादी ढांचे पर भी काम हो रहा है। MCD 70 नए मशीनीकृत रोड स्वीपर तैनात करने की योजना बना रहा है, हालांकि यूरोपीय यूनिट्स की डिलीवरी में देरी के कारण फिलहाल 40 अतिरिक्त स्वीपर किराए पर लिए गए हैं। NHAI ने भी करीब 60 वॉटर स्प्रिंकलर, 14 एंटी-स्मॉग गन और 23 मैकेनिकल स्वीपर तैनात किए हैं। PWD द्वारा 47 प्रदूषण हॉटस्पॉट्स को टारगेट किया गया है और 3,000 किमी के सड़क नेटवर्क में से 1,193 किमी का पुनर्विकास पूरा कर लिया गया है।
वाहनों के प्रदूषण को रोकने के लिए फरवरी तक पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया गया है और 'नो PUC, नो फ्यूल' नियम को सख्ती से लागू किया जा रहा है। इसके अलावा, 1 नवंबर से दिल्ली के बाहर पंजीकृत वे पेट्रोल और डीजल वाहन, जो BS-VI मानकों को पूरा नहीं करते, उन्हें शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, चुनौतियों का सामना अब भी करना पड़ रहा है, क्योंकि वर्तमान आकलन के अनुसार मशीनीकृत स्वीपर शहर की बड़ी और मध्यम सड़कों के केवल 35-40% हिस्से को ही कवर कर पा रहे हैं।